विकास कार्य की आस:पर्यटन काे बढ़ावा दे रहे ताकि गाेलियाें की जगह पर्यटकाें की हंसी सुनाई दे, झारखंड से देश के विकास की पहल हुई- सीएम: रांची - AKB NEWS

विकास कार्य की आस:पर्यटन काे बढ़ावा दे रहे ताकि गाेलियाें की जगह पर्यटकाें की हंसी सुनाई दे, झारखंड से देश के विकास की पहल हुई- सीएम: रांची


 

  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की इंडिया काॅन्फ्रेंस काे मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने किया संबाेधित
  • देश का पहला लोह संस्थान और खाद कारखाना स्थापित हुआ
  • मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने शनिवार रात हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की इंडिया काॅन्फ्रेंस काे संबाेधित किया। उन्हाेंने कहा-झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है। लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2000 में यह अलग राज्य बना। अलग राज्य की परिकल्पना इसलिए की गई थी कि यहां के लाेगाें का विकास हाे सके। लेकिन 20 साल बाद भी झारखंड वहां नहीं पहुंच सका, जहां पहुंचना चाहिए था। झारखंड से देश के विकास की पहल हुई है। देश का पहला लोह संस्थान और खाद कारखाना स्थापित हुआ।

    रेशम और लाह काे कृषि का दर्जा दिया जा रहा है। खनिज के मामले में झारखंड आगे है और अब पर्यटन काे बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि गाेलियाें की आवाज की जगह पर्यटकाें की हंसी सुनाई दे। उन्हाेंने कहा-मैं एक आदिवासी हूं और मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचा हूं। लेकिन यह आसान नहीं था। क्याेंकि संविधान में प्राप्त संरक्षण के बावजूद आदिवासियाें काे जगह नहीं दी गई। सदियाें से इन्हें दबाया गया। आज भी यही मानसिकता है। यह चिंता की बात है। यही वजह है कि सरकार आदिवासी बच्चाें काे विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानाें में पढ़ाई का अवसर दे रही है।

    किस मुद्दे पर क्या बाेले मुख्यमंत्री

    काेराेना काल पर

    झारखंड के लाखाें श्रमिक राेजगार की तलाश में दूसरे राज्याें में जाते हैं। काेराेना संक्रमण काल में श्रमिकाें के प्रति अमानवीय चेहरा नजर आया। राज्य सरकार ने केंद्र से उन्हें वापस लाने की गुहार लगाई। सबसे पहले झारखंड ने अपने श्रमिकाें काे वापस लाया। उन्हें राेजगार देने के लिए मनरेगा के तहत 900 लाख मानव दिवस का सृजन किया। संक्रमण काल में एक भी व्यक्ति की भूख से माैत नहीं हाेने दी।

    आदिवासियाें के हिताें पर

    उन्हाेंने कहा कि झारखंड में कई तरह के आदिवासी हैं। उनकी अस्मिता की रक्षा के लिए काम हाे रहा है। सरकार ने ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनाने का फैसला लिया है, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में इनका विकास हाे सके। पूरे देश में आदिवासियाें की पहचान कायम रहे।

    नौकरी और रोजगार पर

    एक साल के काेराेना संक्रमण काल में कई काम बाधित हुए, लेकिन हमने नई नीतियां बनाई। हमारी सरकार खेल नीति ला रही है, जिसमें खिलाड़ियाें की सीधी नियुक्ति का प्रावधान है। 2021 को नौकरियों का वर्ष घोषित किया है। पूरे साल नौकरी दी जाएगी।

    इधर, नीति आयाेग की बैठक में उठाई मांग

    जनगणना में आदिवासियाें के लिए अलग काॅलम हाे

    नीति आयाेग की वर्चुअल बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियाें के सामने झारखंड की मांग काे प्रभावी ढंग से उठाया। उन्हाेंने कहा- आदिवासी हिताें की सुरक्षा के लिए जनजातीय कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ। संविधान में पांचवीं और छठी अनुसूची भी बनाई गई। आदिवासियाें की सभ्यता, संस्कृति अलग है। वह वर्षाें से जनगणना में अपनी जगह स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। हमने झारखंड विधानसभा से पास कर सरना आदिवासी धर्म काेड का प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

    उन्हाेंने कहा कि झारखंड मजदूर प्रधान राज्य है। इनके लिए राेजगार सृजन कैसे हाे, इस पर भी विचार करने की जरूरत है। मनरेगा मजदूराें की मजदूरी बढ़ाई जाए। वृद्धों के लिए यूनिवर्सल पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। खनन राॅयल्टी, डिस्ट्रिक्ट मिनरल्स फाउंडेशन ट्रस्ट फंड के अलावा केंद्र पार्टनरशिप की दिशा में विचार करे। राज्य जंगल -झाड़ियाें से घिरा है। उद्याेग स्थापित करने में उद्यमियाें काे फाॅरेस्ट क्लीयरेंस लेने में परेशानी हाेती है। वन भूमि अधिग्रहीत करने पर उसके बराबर जमीन देने में परेशानी हाेती है। केंद्र इस कानून काे लचीला बनाए ताे उद्याेग लगाने में आसानी हाेगी।


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