वैक्सीनेशन को लेकर अच्छी खबर:टीके के दो डोज लेने वाले डॉक्टर्स में बनी 3500% तक एस प्रोटीन एंटीबॉडी, 6 महीने तक सुरक्षित सूरत लेखक: सूर्यप्रकाश तिवारी - AKB NEWS

वैक्सीनेशन को लेकर अच्छी खबर:टीके के दो डोज लेने वाले डॉक्टर्स में बनी 3500% तक एस प्रोटीन एंटीबॉडी, 6 महीने तक सुरक्षित सूरत लेखक: सूर्यप्रकाश तिवारी


 वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद कई डॉक्टरों में 40% और किसी में तो 3500% तक एस प्रोटीन एंटीबॉडी तैयार हो गई है, जो कोरोना से बचाव के लिए काफी कारगर है। (सिम्बॉलिक इमेज)

  • कोरोना से बचाव के लिए काफी कारगर हाई लेवल एंटीबॉडी हुई तैयार
  • कोरोना का टीका कितना असरकारक, इस पर दोनों डोज ले चुके डॉक्टरों से बातचीत
  • कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन का काम देशभर में चला रही है। सूरत में भी विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और निजी अस्पतालों में वैक्सीनेशन का काम चल रहा है, लेकिन लोगों में वैक्सीन को लेकर डर भी देखा जा रहा है। ऐसे डॉक्टर जिन्होंने वैक्सीन की दूसरी डोज भी ले ली है। उनके अनुसार उनमें अब हाई लेवल की एंटीबॉडी तैयार हो गई जो कोरोना वायरस के बचाव के लिए काफी कारगर है।

    वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद कई डॉक्टरों में 40% और किसी में तो 3500% तक एस प्रोटीन नामक एंटीबॉडी तैयार हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि जिसमें जितना एंटीबॉडी रहेगा वह उतने लंबे समय तक कोरोना से सुरक्षित रह सकेगा। डॉक्टर बताते हैं कि 400% एंटीबॉडी बनने पर लगभग 6 से 8 माह तक कोरोना से बचा जा सकता है। इस एंटीबॉडी से किसी भी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। दैनिक भास्कर ने ऐसे डॉक्टरों से बात की जिन्होंने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली और अब उनमें हाई लेवल की एंटीबॉडी बन गई है।

    कोरोना की वैक्सीन कितनी असरकारक है इस पर हमने दोनों डोज ले चुके डॉक्टरों से बात की...

    वैक्सीन के बाद कोरोना होता है तो भी उसका असर माइल्ड रहेगा

    डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन का रिजल्ट भले ही 80 फीसदी बताया गया है, लेकिन जिन लोगों में वैक्सीन लेने के बाद एंटीबॉडी बन गई है अगर उन्हें कोरोना होता भी है तो वह माइल्ड होगा यानी आपको अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है और आप का जीवन सुरक्षित रहेगा।

    दो तरह की होती है एंटीबॉडी

    कोरोना से ठीक होने के एक से दो माह में एंटीबॉडी बन जाती है। यह 1 से 150 % तक हो सकता है। इसे सी एंटीबॉडी कहते हैं। जबकि वैक्सीनेशन के बाद एस प्रोटीन नामक एंटीबॉडी बनती है। यह 15 से 4000% तक हो सकता है। डॉ. मधुकर परीख बताते हैं कि अगर एंटीबॉडी नहीं भी बनी तो वैक्सीनेशन के टी सेल मेमरी से भी प्रोटेक्शन मिल सकता है इसलिए एंटीबॉडी कम या ज्यादा से कोई फर्क नहीं पड़ता।

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