आज की पॉजिटिव खबर:हरियाणा के टीचर ने पत्नी के साथ मिलकर मधुमक्खी पालन शुरू किया; सालाना 40 लाख रुपए कमाई हो रही: झज्जर, हरियाणा
आज की पॉजिटिव खबर में बात हरियाणा के झज्जर के रहने वाले जगपाल सिंह फोगाट और उनकी पत्नी मुकेश देवी की। जगपाल ने B.Ed किया है। करीब 20 साल तक उन्होंने टीचिंग का काम किया। अभी वे मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। हर साल वे 60 से 70 क्विंटल शहद का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें सालाना 40 लाख रुपए की कमाई हो रही है।
50 साल के जगपाल बताते हैं कि B.Ed करने के बाद एक स्कूल में मैं पढ़ाने लगा। ठीक ठाक आमदनी भी हो रही थी। लेकिन, मैं कुछ अलग करने के बारे में सोचता रहता था। इसी दौरान मेरे एक रिलेटिव ने मधुमक्खी पालन के बारे में बताया। मुझे उनका आइडिया पसंद आया, लेकिन मुश्किल ये थी कि इसकी शुरुआत कैसे की जाए। तब लोग इतने अवेयर नहीं थे और न ही आज की तरह सोशल मीडिया का जमाना था।
30 बॉक्स के साथ शहद का बिजनेस शुरू किया
जगपाल ने मधुमक्खी पालन के बारे में जानकारी जुटाने के लिए किताबें पढ़नी शुरू कीं और फिर थोड़ी बहुत जानकारी मधुमक्खी पालन करने वालों से मिलकर जुटाई। इसके बाद 2001 में उन्होंने नौकरी करते हुए 30 बॉक्स के साथ शहद का बिजनेस शुरू किया। वे बताते हैं कि मैं डिब्बे में शहद रखकर मार्केट में बेचने लगा। इससे अच्छी कमाई होने लगी। फिर मेरी पत्नी ने भी साथ देना शुरू किया और हम इसे बड़े लेवल पर ले जाने के बारे में सोचने लगे।
ट्रेनिंग के बाद खुद की प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की
जगपाल बताते हैं कि पहले हमलोग अपना प्रोडक्ट शहद बनाने वाली कंपनी को देते थे। वे इसे अपना ब्रांड बनाकर अधिक दाम पर बेचते थे। ऐसे में हमें अपने उत्पाद की कम कीमत मिलती थी। हमने सोचा कि हम अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग खुद करेंगे। 2014 में मैंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह बिजनेस पर फोकस करने लगा। 2016 में मेरी पत्नी मुकेश ने कृषि विज्ञान केंद्र से मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग ली और हमने प्रोसेसिंग का काम करना शुरू कर दिया। हमने खुद की प्रोसेसिंग यूनिट लगाई और अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग करने लगे। जगपाल की पत्नी शहद को बॉक्स से निकालने से लेकर उसकी प्रोसेसिंग और पैकिंग का काम करती हैं। फिर वे मार्केट में इसे बेचते हैं।
अभी जगपाल 10 तरह का शहद तैयार कर रहे हैं। जिनमें तुलसी शहद, नीम शहद, अजवाइन शहद, जामुन शहद, सरसों शहद, धनिया शहद जैसी वैराइटी शामिल हैं। वे बताते हैं कि तुलसी शहद बनाने के लिए मधुमक्खी के बक्सों को तुलसी के बाग में रखा जाता है। जहां मधुमक्खियां तुलसी पर ही रसपान करतीं हैं। इसके बाद जो शहद मिलता है, उसमें तुलसी के गुण मौजूद होते हैं। इसी तरह दूसरी तरह का शहद भी तैयार किया जाता है।
वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर करते हैं मार्केटिंग
अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए जगपाल ने वॉट्सऐप ग्रुप बना रखा है। जिसे भी शहद चाहिए वे ग्रुप में मैसेज भेजता है। फिर उसके पते पर कूरियर के माध्यम से प्रोडक्ट भेज दिया जाता है। इसके साथ ही कई लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी उनसे संपर्क करते हैं। जगपाल बताते हैं कि हर महीने 200 के करीब ऑर्डर आते हैं। दिल्ली, राजस्थान, यूपी सहित कई राज्यों में प्रोडक्ट की सप्लाई कर रहे हैं। इस बिजनेस के माध्यम से हमने 20 लोगों को रोजगार भी दिया है।
किस तरह बनता है शहद
सबसे पहले मधुमक्खियां फूलों का रस पीती हैं। इसके बाद वे वैक्स की बनी पेटी में मलत्याग करती हैं और यही मल शहद के रूप में परिवर्तित होता है। शुरुआत में इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, लेकिन रात में मधुमक्खियां अपने पंख की मदद से शहद से पानी अलग कर देती हैं।
शहद निर्माण की यह प्रक्रिया लगातार 7-8 दिनों तक चलती है। इस तरह के शहद को कच्चा शहद कहा जाता है। इसके बाद शहद को पकाने के लिए रखा जाता है। करीब 12 से 15 दिनों में शहद पक कर तैयार हो जाता है, जिसे पेटी से निकाल लिया जाता है। इस शहद का सीधे उपयोग किया जा सकता है।
किन चीजों की जरूरत होती है
- इसके लिए खुली जगह की जरूरत होती है, जहां मधुमक्खियों के पालन के लिए पेटियां रखी जा सकें।
- लकड़ी के बने बक्से और मुंह की सेफ्टी के लिए जाली।
- मधुमक्खियों की उन्नत किस्म।
- हाथों के लिए दस्ताने और धुंआदानी।
- अगर आप 200 से 300 पेटियों में मधुमक्खियां पालते हैं तो आपको 4 से 5 हजार स्क्वायर फीट जमीन चाहिए। मधुमक्खी की चार प्रजातियों में से इटालियन मधुमक्खी सबसे अच्छी मानी जाती है। यह शांत स्वभाव की होती है और छत्ता छोड़कर कम भागती है।
मुनाफा कैसे कमाएं
शहद का बिजनेस 10 बॉक्स के साथ शुरू किया जा सकता है। इसके लिए करीब 30 हजार रु खर्च होंगे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। एक महीने में एक पेटी से चार किलो तक शहद मिल सकता है, जिसे बाजार में 200 से 300 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा सकता है। इसके साथ ही अगर हम उसकी प्रोसेसिंग करने लगे तो 500 रुपए किलो के हिसाब से भी आसानी से बेचा जा सकता है। जगपाल बताते हैं कि एक बार बॉक्स लगाने के बाद सिर्फ मेंटेनेंस का ही खर्च आता है, जो बहुत अधिक नहीं होता है। शहद तैयार करने के लिए सबसे जरूरी होती है फूलों की उपलब्धता। अगर हमें फूल मिलते रहें तो सालों इससे कमाई की जा सकती है।


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