दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका:नॉन फिल्मी सॉन्ग्स के लिए बने सेंसर बोर्ड, कारण- ऐसे गानों की अश्लील भाषा महिलाओं से अभद्रता करने उकसाती है - AKB NEWS

दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका:नॉन फिल्मी सॉन्ग्स के लिए बने सेंसर बोर्ड, कारण- ऐसे गानों की अश्लील भाषा महिलाओं से अभद्रता करने उकसाती है


दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें ऐसे निकाय या बॉडी का गठन करने की अपील की गई है जो तत्काल प्रभाव से इंटरनेट पर मौजूद अश्लील सामग्री वाले सभी गैर-फिल्मी सॉन्ग्स की स्क्रीनिंग करे और उन पर बैन लगा सके। जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्ट्री को बुधवार को एक नोटिस जारी किया। जिसमें 17 मई की सुनवाई से पहले मामले की जांच के आदेश दिए।

याचिकाकर्ता ने टोनी और नेहा कक्कड़ के सॉन्ग शोना शोना और हनी सिंह के सॉन्ग्स सैयां जी और मखना के लिरिक्स का हवाला दिया है।

रेगुलेटरी बॉडी की डिमांड की
इतना ही नहीं याचिका में यह भी कहा गया है कि जो नॉन फिल्मी सॉन्ग्स टेलीविजन, यूट्यूब जैसे मीडिया प्लेटफार्म्स पर लोगों के लिए अवेलेबल रहते हैं। उनके लिरिक्स और वीडियो को सेंसर करने, उनकी समीक्षा करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी या सेंसर बोर्ड का गठन किया जाए। इसी तरह के नॉन फिल्मी सॉन्ग्स की पब्लिक डोमेन में अवेलेबिलिटी से पहले सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य किया जाए।

याचिका प्रैक्टिसिंग लॉयर नेहा कपूर और मोहित भादु ने दायर की है। जिसमें कहा गया है कि अगर इस तरह के कंटेंट को रेगुलेट नहीं किया गया तो हम लैंगिक समानता के मामले में पीछे की ओर आ जाएंगे। साथ ही महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल नहीं दे पाएंगे।

महिलाओं से अभद्रता करने उकसाते हैं गाने
याचिका में कहा गया कि ऐसे सॉन्ग्स लोगों को महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए उकसाते हैं, उन्हें प्रेरित करते हैं और अन्य अपराधों के अलावा नशीली दवाओं, शराब के दुरुपयोग को बढ़ावा देते हैं। जो उनके लिरिक्स में साफ तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। इसका समाज पर व्यापक रूप से प्रभाव पड़ता है। खास तौर पर युवा, जो लगातार इनके संपर्क में हैं। उनकी कच्ची उम्र को आसानी से बिगाड़ रहा है।

महिला अधिकारों और सुरक्षा के खिलाफ हैं सॉन्ग्स
ऐसे गानों पर रोक लगाने के लिए एक रेगुलेटरी बोर्ड की तत्काल आवश्यकता है। बिना किसी प्रतिबंध के समाज में साझा किए जाने के कारण ऐसा कंटेंट जनता पर विशेषकर युवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ये गाने उन्हें महिलाओं को आपत्तिजनक शब्द कहकर शर्मिंदा करने के लिए उकसाते हैं। ये कंटेंट एक स्वतंत्र और निष्पक्ष समाज में महिला अधिकारों के खिलाफ है।

 

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