100 से ज्यादा नक्सलियों ने वनकर्मियों को बंधक बनाया; 12 भवन उड़ाए, 13 वाहन फूंके
काेल्हान प्रमंडल मुख्यालय चाईबासा से मात्र 12 किमी दूर खूंटपानी प्रखंड के बरकेला फाॅरेस्ट रेंज ऑफिस में माओवादियाें ने शनिवार की रात वन विभाग के कर्मचारियाें काे बंधक बनाकर पांच घंटे तक उत्पात मचाया।
कर्मचारियाें से मारपीट की। विस्फाेट कर वन विभाग के 12 भवन उड़ा दिए और 13 छाेटी-बड़ी गाड़ियां भी जला दीं।
घटना के 28 घंटे बीत जाने के बाद भी सुरक्षा कारणाें का हवाला देते हुए पुलिस घटनास्थल तक नहीं पहुंची थी। सरकार की ओर से एक कराेड़ के इनामी मिसिर बेसरा उर्फ सुनिर्मल उर्फ भास्कर के दस्ते ने घटना काे अंजाम दिया है।
रात करीब 10 बजे दस्ते के 100 हथियारबंद नक्सलियों ने फाॅरेस्ट रेंज ऑफिस काे चाराें ओर से घेर लिया।दस्ते ने रेंज ऑफिस में माैजूद फॉरेस्टर, दर्जनभर वनरक्षी, मजदूर और उनके परिवार के बच्चाें व महिलाओं काे 500 फीट दूरी पर माैजूद पंचायत भवन में बंधक बनाकर मारपीट की। रविवार तड़के तीन बजे तक नक्सली तांडव मचाते रहे। बम और सिलेंडर का इस्तेमाल करते हुए भवन काे उड़ाते रहे। जाते-जाते नक्सली वहां पाेस्टर और पर्चा छाेड़ गए। उन्हाेंने रेंज ऑफिस काे हटाने और वन अधिकारियाें काे मार भगाने की चेतावनी दी है। इधर, घटना के बाद रेंज | ऑफिस छाेड़कर सभी वनरक्षी, फॉरेस्टर परिवार सहित भाग गए हैं।
रात 10 से सुबह 3 बजे तक विस्फोट करते रहे
नक्सलियाें ने बरकेला फॉरेस्ट रेंज ऑफिस के रेस्ट हाउस, वनरक्षी भवन, फॉरेस्टर हाउस काे उड़ा दिया। रात दस बजे सड़काें काे सील कर दिया था। उसके बाद कर्मियों काे धमकाते हुए क्वार्टराें से निकालकर पंचायत भवन ले गए। फिर एक-एक भवन काे सुबह तीन बजे तक बम से उड़ाते रहे।
काेल्हान वन प्रमंडल की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी। नक्सलियाें ने उस जमाने से अब तक के रेंज ऑफिस में रखे सभी सरकारी दस्तावेज काे फूंक दिया है। रेंजर शंकर भगत के अनुसार, कराेड़ाें की संपत्ति बर्बाद हाे गई।
महिला वनपाल की जुबानी, घटना की कहानी...बंधक बना पीटा, सबकाे भागने की धमकी दी
घटना के वक्त वनपाल प्रिंची बुड़ीउली अपने घर में थीं। उन्हाेंने भास्कर को बताया कि रात करीब 10.20 बज रहे थे। मैं साे रही थी। तभी पड़ाेस से आवाज आई कि ऑफिस के पास कुछ लाेग ताेड़फाेड़ कर रहे हैं। महिलाओं की आवाज भी आ रही थी। मैं खिड़की से झांककर देखी ताे बाहर हथियारों सेे लैस कई लाेग जमा थे। मैं समझ चुकी थी कि वे नक्सली हैं, मैंने क्वार्टर की लाइट बंद कर दी। थाेड़ी देर बाद कुछ लाेग मेरे क्वार्टर पर आए और दरवाजा धकेलने लगे।
दरवाजा टूटते ही वे अंदर घुस आए और मुझे पकड़ लिया। मेरे साथ मारपीट की गई। दाहिना कान सुन्न हाे गया। मुझे और मेरे सहकर्मियाें को बंधक बनाकर एक जगह खड़ा कर दिया। इसके बाद वे विस्फाेट कर भवन काे उड़ाते रहे। गाड़ियां जलाते रहे। वे अधिकारियाें काे खाेज रहे थे। फिर हमारे पास आए और धमकी दी...आपलाेग लकड़ी काटने वाले ग्रामीणाें काे परेशान करते हैं। जंगल उन लाेगाें की संपत्ति है। यहां से आपलाेग चले जाइए।
नक्सलियाें पर हाेगी कार्रवाई : डीआईजी
यहां छिपा नक्सली संगठन कमजाेर हाे चुका है। माअाेवादी नेता मिसिर बेसरा और माेछू का दस्ता सक्रिय है। इनके सफाए के लिए रणनीति तैयार है। सुरक्षा पर ध्यान देते हुए कार्रवाई होगी। -राजीव रंजन सिंह, डीआईजी
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