आजादी के बाद से एक पुल के लिए तरस रहे बिराजपुर के लोग
रमकंडा प्रखंड के बिराजपुर पंचायत के कई गांव के ग्रामीणों को बरसात के मौसम में रंका अनुमंडल आने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में चेटे ,टेढ़ी कहुआ गांव के ग्रामीणों रमेश सिंह, बिरझन भुइयां, सलमान अंसारी आदि ने बताया कि सात दशक बीतने को है। परंतु हमारे गांव के बीच में हाठु नदी पर एक पुल नहीं बन सका।
नदी की लंबी पाठ होने के कारण 4 माह तक इस नदी में पानी का बहाव रहता है। इस बीच हम लोगों को अगर रंका अनुमंडल जाना है तो 40 किलोमीटर घूमकर रमकंडा होते हुए रंका अनुमंडल जाना पड़ता है। इसको लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी इस बात से अवगत कराया गया है। परंतु किसी जनप्रतिनिधियों ने हम गांव वाले का दुखड़ा नहीं सुना। ग्रामीणों ने बताया कि इस नदी में एक दर्जन से ऊपर लोग बह कर काल के गाल में समा चुके हैं।
इस नदी में बहने वाले व्यक्तियों के नाम इस प्रकार है, मंगरू मुंडा, रामधनी राम, रामवृक्ष कोरवा, किन्नू मुंडा, धनिया कुंवर, बिट्टू राम आदि एक दर्जन से ऊपर इस नदी के काल के गाल में समा चुके हैं। गांव के ग्रामीणों ने बताया कि रंका अनुमंडल मात्र इस नदी को पार कर 9 किलोमीटर में रंका अनुमंडल पहुंच जाते हैं। एक नदी पार कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि 4 दिन से पानी कम होने का इंतजार कर रहे थे।
परंतु रंका अनुमंडल आना आवश्यक था। इसलिए किसी प्रकार नदी पार की परंतु नदी पार करने में हम थक चुके थे। किसी प्रकार नदी पार कर पाया गांव के ग्रामीणों का मांग है कि सरकार थोड़ा ध्यान देते हुए इस गांव में जाने के लिए एक पुलिया का निर्माण किया जाए। ताकि गांव के ग्रामीण बरसात के मौसम में अपने लोगों से जुदा ना हो सके, इस गांव के लोग बरसात के समय में भी रंका अनुमंडल से जुड़ सकें।
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