जमशेदपुर को औद्योगिक नगर घोषित करने का मामला लटका, सीएम की मौजूदगी में हुई बैठक में नहीं निकला कोई नतीजा
सीएम हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जमशेदपुर को औद्योगिक नगरी घोषित करने पर सहमति नहीं बनी। सीएम ने नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि टाटा स्टील के अधिकारियों संग बैठक कर मामले पर कार्रवाई करें। बैठक में नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव विनय कुमार चौबे ने प्रेजेंटेशन देकर सीएम को जानकारी दी। बताया कि जमशेदपुर औद्योगिक नगरी गठन को लेकर 2005 से ही प्रयास जारी है। जमशेदपुर औद्योगिक नगरी गठन करने के संबंध में किए अद्यन की जानकारी दी।
सीएम को बताया कि 30 जनवरी 2017 को उपायुक्त जमशेदपुर द्वारा 10889.32 एकड़ भूमि में औद्योगिक नगरी व 4496.46 एकड़ में जमशेदपुर नगर निगम गठित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को उपलब्ध कराया, जिसे 19 दिसंबर 2017 को टाटा स्टील के एमडी को निदेशक बोर्ड से सहमति लेकर सूचित करने को कहा। विभागीय सचिव ने बताया - झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 13 (3) के प्रावधान के अनुसार जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति को नगरपालिका क्षेत्र में घोषित करने का प्रस्ताव है। जिसके बाद अधिसूचित क्षेत्र समिति में झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2012 के समस्त प्रावधान लागू होंगे। जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति को नगरपालिका क्षेत्र के रूप में घोषित करने के निमित्त प्रस्ताव भी तैयार किया था, जिसपर तत्कालीन विभागीय मंत्री की सहमति प्राप्त की व विधि विभाग द्वारा विधिक्षा की जा चुकी है। सचिव ने कहा- उक्त प्रस्ताव पर बार-बार वित्त विभाग की पृक्षा के क्रम में विभाग द्वारा स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई झारखंड नगरपालिका अधिनियम अधिसूचित क्षेत्र समिति द्वारा करने पर आपत्ति व दायर वादों के क्रम में की जा रही है।
कंपनी सरकार का सहयोग नहीं कर रही- सरयू
झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत राज्य में अधिसूचित क्षेत्र समिति नहीं हो सकता है। किसी भी नगरीय क्षेत्र को नगरपालिका का दर्जा देना अनिवार्य है। लेकिन जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति अस्तित्व में है और काम भी कर रहा है। तरह-तरह के टैक्स वसूली जारी है। इसकी वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए टाटा कंपनी व अन्य लोगों द्वारा हाईकोर्ट में केस किया है। अक्षेस की वैधानिकता पर सवाल खड़ा किया है। इसके अलावा जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। डीसी द्वारा अक्षेस व नगर निगम के लिए चिन्हित जमीन के आंकड़े को सही नहीं बताया है। टाटा कंपनी भी मामले में सरकार का सहयोग नहीं कर रही है।
from Dainik Bhaskar

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