सूप में पान, सुपारी, सिंदूर अर्पित कर मां का किया आवाहन
बंगाली समाज में दुर्गोत्सव की शुरुआत षष्ठी पूजा के साथ हुई। बिष्टुपुर आरके मिशन, बेल्डीह कालीबाड़ी, साकची स्थित जमशेदपुर दुर्गाबाड़ी, सोनारी आमरा सबाई क्लब, काशीडीह दुर्गा मंदिर, नामदा बस्ती दुर्गा काली मंदिर समेत अन्य दुर्गा मंदिरों में मां को आमंत्रित किया गया। मां का आमंत्रण व अधिवास किया गया।
बेल के पेड़ के नीचे सूप में पान, सुपारी, सिंदूर, चंदन, सुहाग की सामग्री सहित खाने-पीने की चीजें अर्पित की। विभिन्न मंदिरों में बेलवरण पूजा हुई। आगोमनी, ढाक, बेलवरण, संध्या आरती, शंख ध्वनि, उल्लू ध्वनि के साथ मां का आवाहन किया।
षष्ठी: बेलवरण, बोधन के साथ अधिकतर पंडालों में विराजीं मां
षष्ठी के दिन मां कात्यायनी की पूजा हुई और बेलवरण के साथ ही सभी पंडालों के पट खुल गए। कोरोना और प्रशासन की सख्ती के कारण पंडालों में ढाक की आवाज सुनाई तो पड़ी, लेकिन भक्तों के जयघोष से वातावरण नहीं गूंज पाया। दूसरी ओर, पंडालों में मां के दर्शन के लिए कम ही श्रद्धालु पहुंचे। इधर, शुक्रवार को सप्तमी पूजा होगी।
इस दिन सुबह में नवपत्रिका पूजा होगी। केले के पेड़ को गणपति की पत्नी का रूप मानते हुए उसे सुहागिन की तरह लाल साड़ी लपेट कर वैदिक विधि से पूजा करते हैं। घट स्थापना की जाती है। षष्ठी पूजा में जब माता का बोधन करते हैं तो घर के सभी सदस्य नए वस्त्र पहनते हैं।

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