मानदेय की मार झेल रहे संविदाकर्मी, निजी कर्मियों का भी हाल बेहाल
पूजा त्योहार में भी मानदेय भुगतान नहीं होने से जिला के संविदाकर्मियों में रोष है। लंबे समय से मानदेय से वंचित रहने से उनकी माली हालत काफी दयनीय हो चुकी है। विभिन्न विभागों में तैनात संविदाकर्मियों की स्थिति कमोबेश एक जैसी है। सबों को एक ही चिंता सताये जा रही कि, दुर्गा पूजा मने तो कैसे। घर वालों के लिए कपड़े, पकवान आदि की चिंता खाये जा रही है । बच्चों की फीस का भी दबाव बनना शुरू हो गया है।
दुकानदारों की राशन की देनदारी भी चुकता करनी है। ताकी पुन: वह त्योहार के मौके पर उधार दे सके। कई संगठनों ने तो विरोध तक की तैयारी कर रखी है। इस क्रम में जल सहिया शनिवार को सड़कों पर उतर आई। झारखण्ड राज्य जल सहिया कर्मचारी संघ के बैनर तले सबों ने आंदोलन शुरू कर दिया। वहीं निजी कर्मियों की विवशता कुछ अलग है। वे चाह कर भी खुल कर अपनी मांगें प्रबंधन के समक्ष नहीं रख पाते हैं। ऐसा करने पर उन्हें नौकरी से हटाये जाने का डर रहता है। कोरोना काल में लंबे समय से निजी स्कूल व संस्थान बंद हैं। वहां के कर्मियों को भी लंबे से वेतन नहीं मिला है। इधर सदर अस्पताल में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को भी पिछले दाे माह से तनख्वाह नहीं मिली है। पीछे का तीन महीने का तनख्वाह भी अटका पड़ा है।

Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें