प्री-मैट्रिक अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति:3,550 में 399 स्कूल और उनके 18 हजार छात्र निकले फर्जी, पिछली गड़बड़ी के बाद जांच में हुआ खुलासा रांची लेखक: विनय चतुर्वेदी
- झारखंड में छात्रवृत्ति हड़पने के लिए कागजों पर चल रहे संस्थान
- अस्तित्व नहीं, पर लेते रहे लाभ: हुई तो संस्थान वर्षों से बंद मिले, न नामांकन हुआ, न ही पढ़ाई
- एक-एक आवेदन की हो रही जांच; इस बार 46,551 में 43,001 संस्थानों ने एप्लाई ही नहीं किया
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के पैसे हड़पने के लिए सिर्फ कागजों पर ही कई स्कूल चल रहे हैं। इसका खुलासा स्कॉलरशिप लेने के लिए कल्याण विभाग में रजिस्टर्ड संस्थानों के फिजिकल वैरिफिकेशन में हुआ। पता चला कि झारखंड में रजिस्टर्ड 46,551 संस्थानों में से 43,001 संस्थानों से किसी भी बच्चे ने स्कॉलरशिप के लिए शैक्षणिक सत्र 2020-21 में आवेदन ही नहीं किया। और जो बचे 3550 संस्थानों ने आवेदन दिए थे, उनमें से 399 फर्जी हैं और वर्षों से बंद हैं।
इनमें किसी का नामांकन नहीं हुआ और न ही पढ़ाई होती है। पर, इन संस्थानों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया है। ऐसे संस्थानों के 18 हजार विद्यार्थियों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। यह संख्या अभी बढ़ सकती है, क्योंकि आवेदन करनेवाले संस्थानों और आवेदकों का 20 फरवरी तक फिजिकल वैरिफिकेशन होना है। हालांकि, अधिकतर जिलों ने जांच पूरी कर ली है।
जांच में कई नोडल अफसर भी फर्जी मिले हैं। उनका कोई अता-पता नहीं है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता मिलने पर 2020-21 के सभी आवेदकों और उनके संस्थानों की जांच करने का आदेश दिया था। सीएम हेमंत सोरेन ने भी गड़बड़ियों की जांच का आदेश दिया था।
ग्राउंड रिपोर्ट: वर्षों से स्कूल बंद, दरवाजे और खिड़कियां तक उखड़े मिलीं
जिन संस्थानों ने आवेदन नहीं किया, उनकी जांच अभी नहीं हुई है। पर, जिन्होंने आवेदन किया था, वहां फर्जीवाड़ा चौंकाऊ है। 20 फरवरी तक वैरिफिकेशन के बाद और खुलासे होंगे।
5 उदाहरणों से जानिए कैसे-कैसे हथकंडे से छात्रवृत्ति लाभ ले रहे1. लार्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल, हेसल, मांडर
वर्षों से बंद यह स्कूल कबाड़ में तब्दील हो गया है। यहां से पिछले साल 327 बच्चों को छात्रवृत्ति मिली थी।2. इंदिरा गांधी शिशु निकेतन, चक्रधरपुर
यहां से 101 अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन हुआ था। पर, संस्थान चार वर्षों से बंद है। ये 101 आवेदक यहां पढ़ते ही नहीं।
3.विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर, चक्रधरपुर
यहां सभी 66 आवेदन-पत्र फर्जी मिले। कोई भी आवेदक इस संस्थान में नहीं पढ़ता। यह संस्थान पिछले 4 वर्षों से बंद है।
4. कोल्हान शिपिंग अनाथ, बिचागुटू, तांतनगर
यहां से 63 अल्पसंख्यक बच्चों का आवेदन मिला था। संस्थान बंद है। आवेदकों का न तो नामांकन है और न ही कोई यहां पढ़ रहा।
5.चंद्रमणि शिक्षा बिहार दलपोसी, जगन्नाथपुर
यहां के सभी 56 आवेदन पत्र फर्जी मिले। इनमेंं से कोई भी इस संस्थान में न तो नामांकित है और न ही पढ़ाई कर रहा है।कैसे-कैसे फर्जीवाड़े
- स्कूल खंडहर में तब्दील, कोई उधर झांकता भी नहीं।
- स्कूल सही, पर वहां से आए आवेदन गलत। उस नाम का कोई छात्र उस स्कूल में नहीं पढ़ता।
- कई स्कूलों के नोडल अफसर नहीं मिले। प्राचार्य ने कहा, ऐसा कोई आदमी उनके यहां है ही नहीं।
- स्कूल संचालकों ने लाभ लेने के लिए जानकारी छुपाई
पिछले वर्ष मिले 61 करोड़ रुपए में 26 करोड़ के घोटाले की आशंका
पिछले वर्ष प्री मैट्रिक अल्पसंख्यक छात्रों के लिए केंद्र की ओर से 61 करोड़ रुपए मिले थे। इनमें करीब 26 करोड़ रु. घोटाले की आशंका है। 10वीं के छात्रों को दी जानी वाली छात्रवृत्ति में काफी गड़बड़ियां मिली हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय के हस्तक्षेप से एसीबी इसकी जांच कर रही है।


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