शिक्षा में सुधार की कवायद:प्रदेश के सरकारी स्कूलाें में 46.80 लाख बच्चे, सामान्य वर्ग के 1.90 लाख यानी सिर्फ 3.5%; पहली बार जाति आधारित अध्ययन: रांची
- झारखंड के सरकारी स्कूलों के स्तर में मूलचूल परिवर्तन पर काम
- सबसे ज्यादा ओबीसी के 50% बच्चे पढ़ते हैं सरकारी स्कूलाें में, 29% बच्चे एसटी श्रेणी के
- स्थिति सुधारने के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजना का प्रस्ताव कैबिनेट में जल्द, मॉडल स्कूलों की योजना पर तेजी से काम
सामान्य वर्ग के कम ही लोग अपने बच्चाें काे सरकारी स्कूलाें में पढ़ा रहे हैं। पहली से 12वीं तक कुल 46 लाख 79 हजार 662 छात्रों में से सामान्य वर्ग के केवल 1.90 लाख बच्चे पढ़ते हैं। यह संख्या कुल छात्रों का करीब साढ़े तीन फीसदी ही है। इन स्कूलों में करीब 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे ओबीसी कैटेगरी के हैं। एसटी कैटेगरी के बच्चों की संख्या भी उत्साहजनक नहीं है। इनकी संख्या 13 लाख 80 हजार 977 है।
ओबीसी कैटेगरी के 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे सरकारी स्कूलों में नामांकित हैं। इनकी संख्या 23 लाख 1 हजार 324 है। इस तस्वीर को बदलने के लिए राज्य सरकार झारखंड में पहली बार सीएम विशेष छात्रवृत्ति योजना की तैयारी कर रही है। विभाग ने इस योजना के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे शीघ्र ही कैबिनेट में भेजा जाना है। इस योजना पर 11.38 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 1500 रुपए तक प्रति वर्ष बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाएगी।
सामान्य वर्ग के वही बच्चे सरकारी स्कूलाें में, जिनके परिवार गरीब
शिक्षा विभाग को जानकारी मिली है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के बच्चों में अधिकतर की आर्थिक स्थिति कमजोर है। बावजूद इसके, एसटी-एससी या पिछड़े वर्ग के बच्चों की तरह इन्हें साइकिल नहीं मिलती है। इन सभी बच्चों को मिड डे मील का लाभ मिलता है। सामान्य जाति की छात्राओं को अन्य छात्राओं की तरह 12वीं तक फ्री किताबें मिलती हैं।
अधिकतर शिक्षकों के बच्चे भी निजी स्कूलों में ही नामांकित
एक अनुमान के मुताबिक सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले करीब 90 प्रतिशत शिक्षकों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। पिछले दिनों प्राथमिक शिक्षा निदेशक के कार्यालय में पहुंचे सिमरिया के एक शिक्षक प्रदीप कुमार आर्य से जब डायरेक्टर ने पूछा कि उनके बच्चे किस स्कूल में पढ़ते हैं, तो उन्होंने कहा कि निजी स्कूल में।
मॉडल स्कूल देगा निजी स्कूलों को टक्कर, बच्चे होंगे आकर्षित
राज्य में करीब 1500 सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले साल सभी जिला स्कूलों समेत 80 स्कूल मॉडल स्कूल बनेंगे। यहां के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये सभी स्कूल अंग्रेजी मीडियम के होंगे। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इन स्कूलों में समाज के सभी वर्गों के लोग अपने बच्चों का दाखिला कराएंगे।
कम शिक्षक और पढ़ाई का गिरता स्तर बड़ी वजह
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार हरीश मोहन ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की घटती संख्या, पढ़ाई के गिरते स्तर और सीबीएसई के रिजल्ट का बेहतर होना अभिभावकों को निजी स्कूलों की ओर मोड़ रहा है अगर बदलाव नहीं हुआ तो तय है कि वहां पर सिर्फ गरीब लाेग ही मिड डे मील और नि:शुल्क किताबों की आस में अपने बच्चों को भेजेंगे।
स्टडी एक्सचेंज के साथ कक्षा चलाएं, तभी हो सकेगा सुधार
आर्थिक रूप से सक्षम लोग सरकारी स्कूलों का चुनाव विशेष परिस्थिति में ही करते हैं। निजी स्कूलों का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। वैसे सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की गुणवत्ता निजी स्कूलों से कम नहीं है, पर अभिभावक निजी स्कूलों के आउटपुट के कारण उसकी ओर आकर्षित होते हैं। झारखंड सरकार सभी जिला स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित कर रही है। जिला स्कूल को उशहर के टॉप स्कूल के साथ जोड़ा जाए और स्टडी एक्सचेंज के साथ कक्षाएं चले, तभी सुधार होगा।


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