850 मीटर लंबाई बढ़ाकर फोरलेन किया जाएगा डीपीआर बनाने के लिए दो माह और अन्य क्लीयरेंस लेने में तीन माह लगेंगे
राजधानी में बहुप्रतीक्षित कांटाटोली फ्लाईओवर बनाने की अब नई टाइमलाइन तय की गई है। तीसरी बार बनने वाली डीपीआर में फ्लाईओवर पहले की तुलना में 850 मीटर लंबा होगा। इसे अब काेकर शांतिनगर से बहू बाजार होते हुए योगदा सत्संग मठ तक बनाया जाएगा। इस पर 187 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च होंगे। पहले कोकर स्थित शांतिनगर से खादगढ़ा बस स्टैंड के थोड़ा आगे तक बनना था। डीपीआर बनाने के लिए दो माह और अन्य क्लीयरेंस लेने में तीन माह लगेंगे।
वहीं निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य दो साल रखा गया है। बुधवार को परामर्शी एजेंसी एनएल मालविया प्रा.लि. ने नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव विनय कुमार चौबे के समक्ष फिजिब्लिटी रिपोर्ट का प्रेजेंटेशन दिया। सचिव ने इस पर संतुष्टि जताई। साथ ही नई डीपीआर जल्द बनाने और निर्माण शुरू करने का निर्देश दिया। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि कांटाटोली फ्लाईओवर फोरलेन का होगा, जिसमें रेलिंग व डिवाइडर को मिलाकर सड़क की चौड़ाई 16.6 मीटर होगी। कुल लंबाई 2100 मीटर होगी।
कांटाटोली चौक पर जंक्शन बनेगा, बस स्टैंड के पास सड़क उतरेगी
परामर्शी एजेंसी एलएन मालविया ने अपनी फिजिब्लिटी रिपोर्ट में सुगम यातायात के लिए कांटाटोली चौक के जंक्शन के विकास का भी प्रावधान किया है। वहीं, खादगढ़ा बस स्टैंड के पास फ्लाईओवर से दोनों ओर सड़क नीचे उतरेगी, ताकि बस स्टैंड जाने वाले लोगों को सहूलियत हो सके। प्रेजेंटेशन के अनुसार, सिरमटोली की ओर से लालपुर आने वाले वाहनों के लिए फ्लाईओवर से कटकर एक लेन बस स्टैंड की ओर मोड़ दिया जाएगा। वहीं, नामकुम और लालपुर से सिरमटोली की तरफ आने वाले वाहनों के लिए बस स्टैंड के निकट फ्लाईओवर पर एक अतिरिक्त लेन बनेगा।
पहली बार 2012 में बनी थी फ्लाईओवर की डीपीआर
- 2012- अर्जुन मुंडा सरकार के कार्यकाल में पहली डीपीआर बनी।
- 2015- रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में दूसरी बार बनाई गई।
- 2021- अब हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में तीसरी बार बनेगी।
प्री-कास्ट सेगमेंटल बॉक्स गर्डर प्रणाली से बनेगा
इस तकनीक से फ्लाईओवर के पिलर को किसी दूसरी जगह ढाल कर निर्माण स्थल पर ले जाया जाता है और फिर जोड़ दिया जाता है।
रैंप वाले भाग में छोेटे दुकानदारों का पुनर्वास संभव
फ्लाईओवर निर्माण के दौरान विस्थापित दुकानदारों को भी बसाया जा सकता है। फिजिब्लिटी रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग एक एकड़ भू-अर्जन किया जाएगा। संभव हो तो प्रभावित होने वाले छोटे व्यवसायियों को फ्लाईओवर के रैंप पर पुनर्वास कराया जा सकता है।


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