कोरोना ने सिखाया बचत:काेराेना काल के एक साल में झारखंड के लाेगाें ने 12.58% ज्यादा बचाए, रांची के लाेगाें ने सबसे ज्यादा: रांची - AKB NEWS

कोरोना ने सिखाया बचत:काेराेना काल के एक साल में झारखंड के लाेगाें ने 12.58% ज्यादा बचाए, रांची के लाेगाें ने सबसे ज्यादा: रांची


 

  • दिसंबर 2019 में बैंकाें में 2,17,590 करोड़ जमा थे, दिसंबर 2020 तक 2,44,971 कराेड़ हाे गए
  • पूर्वी सिंहभूम दूसरे, प. सिंहभूम तीसरे नंबर पर एजुकेशन-होम लोन घटे
  • काेराेना संकट ने लाेगाें काे बचत का तरीका सिखा दिया। इस दाैरान एक साल में झारखंड के लाेगाें ने बैंकाें में 27,381.08 करोड़ रुपए ज्यादा जमा किए। यानी 12.58 % ज्यादा। एसएलबीसी की रिपाेर्ट के अनुसार दिसंबर 2019 में बैंकों का कुल जमा 2,17,590.01 करोड़ रुपए था, जो दिसंबर 2020 तक 2,44,971.09 करोड़ हो गया। इस दाैरान 2555.83 कराेड़ रुपए ज्यादा कर्ज भी लिए। वर्ष 2019 के दिसंबर तक बैंकों ने 1,20,980.07 करोड़ कर्ज दिया था, जाे दिसंबर 2020 तक कुल 123535.90 करोड़ हाे गया।

    पर्सनल, ट्रेडिंग लाेन 9 माह में टार्गेट से 21.71 % ज्यादा

    नॉन प्रायाेरिटी सेक्टर (बड़े लोन, पर्सनल लोन, ट्रेडिंग लोन आदि) में दिसंबर तक टार्गेट से 21.75 प्रतिशत ज्यादा लोन दिया गया। इस सेक्टर का चालू वित्त वर्ष में अब तक 11,413.22 करोड़ रुपए देने का टार्गेट है। इनमें से दिसंबर 2020 तक 13,896.65 करोड़ रुपए का लोन दिया जा चुका है। दिसंबर 2019 की तुलना में 2020 के दिसंबर तक इसमें 88.75 प्रतिशत की ग्रोथ है। 2019 के दिसंबर तक 7362 करोड़ रुपए का लोन दिया गया था।

    एजुकेशन लोन लेने वाले घटे, 119 करोड़ कम लोन

    चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में दिसंबर तक एजुकेशन लोन के तहत कुल 7625 खातों में 192.23 करोड़ रुपए दिए गए। 2019 के दिसंबर तक शिक्षा लोन के खाते 64,927 थे, जिसमें 3177.76 करोड़ रुपए जमा थे। इस वित्त वर्ष के दिसंबर तक कुल 44,283 खातों में 1876.13 करोड़ हैं, जो 2019 के दिसंबर से 1301.63 करोड़ कम है।

    विशेषज्ञ से जानिए क्याें हुआ ऐसा

    लॉकडाउन में खर्च कम थे, इसलिए बचे

    कोरोना काल में खर्च कम थे, इसलिए बचत हुई। शिक्षण संस्थान बंद होने से 50% छात्रों ने लोन भी नहीं लिया।

    -महेंद्र कुमार जैन, सीए

    लाेन मंजूर हुए पर लाेगाें ने लिए नहीं

    कोरोना काल में बैंकों ने लोगोें को लोन दिया। कई लोन मंजूर हुए, पर लोगों ने लिए ही नहीं।

    -गणेश टोप्पो, डीजीएम, एसएलबीसी

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