शहीद जवानों का अंतिम संस्कार:कहीं सात साल के मासूम ने तो कहीं वृद्ध पिता ने दी मुखाग्नि: झारखंड
शहीद जवानों का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांवों में हुआ, भास्कर टीम वहां पहुंची और परिजनों की तकलीफ बांटी
पश्चिमी सिंहभूम के झरझरा में माओवादियाें के हमले में सिमडेगा कोलेबिरा के गोबरधंसा गांव निवासी किरण सुरीन, पलामू उंटारी रोड के लहरबंजारी गांव के हरद्वार साव और गोड्डा के ललमटिया थाना के धानाबिंदी गांव निवासी देवेंद्र पंडित गुरुवार को शहीद हो गए थे।
तीनों का शव जब उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो लोगों की आंखें झर-झर बह निकलीं। आंखों में आंसू के साथ सभी के दिल में अपने लाल के लिए गर्व भी था। किसी के वृद्ध मां-बाप रो रहे थे, तो कहीं पिता के शव को देख पुत्र लिपट रहा था। पत्नी के आंसू रो-रोकर सूख चुके थे। भाइयों को अपने भाई की शहादत पर गर्व था, लेकिन आंसू न चाहते हुए भी आ ही जाते थे।
जिस गांव में कभी इनका बचपन बीता, वहीं तिरंगे में लिपटा शव देखकर चाचा-काका उनके बचपन याद कर रहे थे। गांववालों-परिजनों में अपनों को खोने का गम है, पर उन्हें जवानों की शहादत पर गर्व भी है। दैनिक भास्कर की टीम तीनों शहीद जवानों के गांव पहुंची और उनके परिजनों की तकलीफें बांटीं। शहीदों के गांव से भास्कर की रिपोर्ट...
सात साल का राहुल और पांच साल का रोशन पिता के शव से लिपटकर कहे- पापा उठिए
ललमटिया थाना के धानाबिंदी गांव के रहने वाले जगुआर जवान देवेंद्र कुमार पंडित को मुखाग्नि 7 साल के बड़े बेटे राहुल ने दी। देवेंद्र जहां गांव की चौपाल में बैठकर लोगों को पुलिस की राेमांचक कहानियां सुनाकर हंसाया करते थे, वहीं बैठे बुजुर्ग उनकी कहानी कहकर रोते दिखे। आसपास के कई गांवों के लोग देवेंद्र पंडित अमर रहे के नारा लगा रहे थे। शव को देखकर उनकी पत्नी और मां कभी बेहोश होती तो कभी होश में आकर देवेंद्र-देवेंद्र कहकर शव पर माथा पटकने के लिए दौड़ पड़तीं। शहीद देवेंद्र का बेटा राहुल जो तीसरी कक्षा का छात्र है अपने पिता को मुखाग्नि देने के पहले लोगों से पूछ रहा था कि मेरे पिता ने नक्सलियों का क्या बिगाड़ा था? दूसरा पुत्र रोशन पिता से लिपटकर बार-बार बोल रहा था- पापा उठिए।
पिता ने कहा- बचपन में कितनी बार इसी कंधे पर पुत्र को उठाया, लेकिन अब नहीं उठता
पलामू के लाल शहीद जवान हरद्वार साव का शव शुक्रवार अहले सुबह 3 बजे जैैैसे ही उंटारी प्रखंड के लहरबंजारी गांव पहुंचा, कोहराम मच गया। मां सुनैना देवी व परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे। ऐसा देख उपस्थित लोगों की भी आंखें भी नम हो गईं। शव आने की सूचना पर गांव के लोग रातभर जगे थे। सब की नींद उड़ी हुई थी। किसी के घर में खाना नहीं बना था।
शव यात्रा शहीद के घर से निकलकर करीब एक किलोमीटर दूर कोयल नदी तट पहुंची। दोपहर 12.40 बजे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पिता कैलाश साव ने मुखाग्नि दी। रोते हुए कहा- बचपन में कितनी बार इसी कंधे पर पुत्र को उठाया था, लेकिन अब नहीं उठा पाऊंगा। यह बोझा नहीं उठता। भगवान ऐसी स्थिति किसी बाप की न करे।
मां के आंसू नहीं थम रहे थे, लेकिन अपने वीर पुत्र पर गर्व कर बोलीं-मेरा बेटा अमर हो गया
सिमडेगा| झारखंड जगुआर के जवान किरण सुरीन का पार्थिव शरीर जैसे ही पैतृक गांव गोबरधंसा पहुंचा, परिजनों के चीत्कार से पुरा गांव गमगीन हो गया। तिरंगे में लिपटे बेटे को देख मां ग्लेडी सुरीन और पत्नी ग्रेस सुरीन का रो-रो कर बुरा हाल हाे गया था। पिता इसराइल सुरीन चुपचाप बेटे को फूल चढ़ा रहे थे। मां रोते हुए बोली- मेरा बेटा देश के लिए शहीद होकर अपना नाम रोशन कर लिया।
शव काफिला में शहीद किरण सुरीन अमर रहे के नारों से पूरा गांव गूंज उठा। कोलेबिरा में हर तरफ मातम पसरा था। सभी घरों के चूल्हे बुझे हुए थे। सभी ने अपने वीर के पार्थिव शरीर को कंधा देते हुए कब्रिस्तान पहुंचाया। वहीं पुलिस के जवानों द्वारा सलामी दी गई और पूरे सम्मान के साथ किरण के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया।


Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें