आस्था:आज से चैत्र नवरात्र, सुबह 05:28 बजे से घट की स्थापना; पहले दिन माता शैलपुत्री की होगी आराधना : धनबाद
13 अप्रैल मंगलवार को नव संवत्सर के साथ ही चैत्र माह की नवरात्रि शुरू हो जाएगी। इस दौरान वसंत ऋतु होने के कारण इसे वासंती नवरात्र भी कहा जाता है। सालभर में 2 गुप्त और 2 प्राकट्य नवरात्र होते हैं। इन्हीं 2 प्राकट्य नवरात्र में से पहली और प्रमुख नवरात्रि चैत्र माह में आती है, जो इस बार 13 अप्रैल से 22 अप्रैल तक रहेगी। पंडिताें के अनुसार इस बार कोई भी तिथि क्षय नहीं होगी, जिससे नवरात्रि पूरे 9 दिनों की रहेगी।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार पूरे साल में 4 बार नवरात्रि मनाई जाती है। इनमें से मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर में प्राकट्य नवरात्रि एवं जनवरी-फरवरी और जून-जुलाई में आने वाली नवरात्रियों को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। प्राकट्य नवरात्रियों में नवदुर्गा की पूजा की जाती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में सिद्धि प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्र जाप के साथ देवी के महाविद्या स्वरूपों की पूजा की जाती है।
इस वर्ष भी अश्व पर सवार हाेकर आएंगी मां दुर्गा
नवरात्रि में मां दुर्गा के वाहन का भी विशेष महत्व माना गया है। ऐसा माना जाता है कि मां दुर्गा हर नवरात्रि के प्रथम दिन अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। मोदिनी ज्योतिष शास्त्र में इस पर प्रकाश डाला गया है। मां के वाहन से भी सुख-समृद्धि का पता लगाया जाता है। विशेष बात ये है कि वर्ष 2020 में जिस वाहन से मां दुर्गा सवार होकर आईं थी। इस वर्ष भी उसी वाहन पर सवार होकर मां दुर्गा आ रही हैं। यानि इस वर्ष मां के वाहन में कोई बदलाव नहीं है। वर्ष 2021 में वासंतिक नवरात्रि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को भी मां दुर्गा का वाहन अश्व ही रहेगा। इस वर्ष मंगलवार से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो रहे हैं। इसलिए मां का वाहन अश्व है।
आराधना से कामनाएं होती हैं पूरी
चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। मां के शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। इन सभी देवियों का विशेष महत्व माना गया है। इन देवियों की पूजा करने से नवग्रहों की शांति भी होती है।
चैत्र नवरात्र का महत्व
मान्यताओं के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ था और मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है। इसके अलावा भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था।


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