2 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के पटरी पर लौटने के संकेत:खपत बढ़ने से अमेरिका में बैंकों को तीन गुना मुनाफा, चीन ने फिर चौंकाया, विकास दर में 18% से ज्यादा ग्रोथ : न्यूयॉर्क
अमेरिकी अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी शुरू होने से पहले वाली स्थिति में लौटती नजर आ रही है। 2021 की पहली तिमाही में बैंकों को हुआ जोरदार मुनाफा इसका ठोस संकेत है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बैंकिंग बिजनेस बढ़ने का सीधा मतलब खपत बढ़ना माना जाता है। यानी बाजार में गतिविधियां बढ़ी हैं। जनवरी-मार्च तिमाही में बैंक ऑफ अमेरिका का मुनाफा सालाना आधार पर दोगुना और सिटीग्रुप का तीन गुना हो गया।
रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई) यानी पूंजी के हिसाब से मुनाफे की बात करें तो इस मामले में सिटीग्रुप के निवेशकों ने 20%, जेपी मॉर्गन के निवेशकों ने 29% और गोल्डमैन सैक्स के निवेशकों ने 33% ग्रोथ हासिल की है। बैंकों के शेयरधारकों ने एक दशक से ज्यादा समय से इतना रिटर्न नहीं पाया था। दरअसल, अमेरिका में अब तक कोविड-19 वैक्सीन के करीब 20 करोड़ डोज लगाए जा चुके हैं।
इसका असर यह हुआ कि बार, रेस्टोरेंट्स, रिटेल स्टोर और मॉल में भीड़ बढ़ने लगी। खपत बढ़ी और बैंकिंग बिजनेस नई ऊंचाई पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए हुआ कि अमेरिका में कैश की जगह क्रेडिट कार्ड ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे बैंकों को बड़ा बिजनेस हाथ लगता है। इसीलिए बैंकों का बिजनेस बढ़ना खपत बढ़ने का संकेत होता है।
जनवरी-मार्च तिमाही में कई अन्य फैक्टर्स ने भी अमेरिका के बैंकिंग सेक्टर को सपोर्ट किया। शेयर बाजार में ट्रेडिंग बढ़ना भी इसमें शामिल है। स्टॉक मार्केट और बॉन्ड मार्केट में रिटेल ट्रेडिंग बढ़ने की वजह से जेपी मोर्गन की इंवेस्टमेंट बैंकिंग यूनिट का मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
इसी तरह 2020 की चौथी तिमाही के मुकाबले 2021 की पहली तिमाही में गोल्डमैन सैक्स का इक्विटी-अंडरराइटिंग रिवेन्यू 40% बढ़ गया। इस बीच खास तौर पर अधिग्रहण के मकसद से बनाई गई कंपनियों (स्पेक्स) का चलन बढ़ने से सिटीग्रुप के इंवेस्टमेंट बैंक की आय में 50% से ज्यादा उछाल आया।
सरकारी मदद मिली, इसलिए भी चीन ने हासिल की उपलब्धि
महामारी के बीच चीन ने जनवरी-मार्च तिमाही में रिकॉर्ड 18.3% जीडीपी ग्रोथ हासिल करके दुनिया को चौंका दिया। वहां निर्यात और घरेलू बाजार में अच्छी मांग के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को लगातार सरकारी मदद मिलने की बदौलत यह उपलब्धि हासिल हो पाई। वैसे यह बढ़त बेस इफेक्ट का भी नतीजा है, क्योंकि चीन ने बाकी देशों से पहले ही कुछ शहरों में लॉकडाउन जैसे उपाय किए थे और वह कोरोना से निपटने में सबसे आगे रहा था। कोरोना संकट के चलते पिछले साल चीन और भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं मंदी में थीं। लेकिन, चीन सिर्फ दो तिमाहियों में ही संकट से उभर आया।


Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें