BREAKING NEWS
JHARKHAND
TOP BUZZ NEWS
TOP STORIES
बीते सात-आठ फरवरी काे चाईबासा के लांजी पहाड़ पर हुई मुठभेड़ के बाद यहां पुलिस का कब्जा माना जा रहा था, लेकिन इसके ठीक 25 दिन बाद झारखंड जगुआर के तीन जवानाें को रॉकेट लॉन्चर से उड़ाकर माओवादियाें ने अपनी ताकत दिखाई। ऐसे ही जुगाड़ राॅकेट लाॅन्चर का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ हमले में भी हुआ। माना जा रहा है कि महाराज प्रमाणिक के अलावा एक कराेड़ का इनामी नक्सली नेता पतिराम माझी उर्फ अनल दा का फिर से पहाड़ पर कब्जा हाे चुका है। इनके साथ 100 से ज्यादा नक्सली हैं।
नक्सलियों का कब्जा:2 माह में 3 बार घटना को अंजाम दिया, ताकि पुलिस पहुंचे तो शिकार बना सकें : चाईबासा
बीते सात-आठ फरवरी काे चाईबासा के लांजी पहाड़ पर हुई मुठभेड़ के बाद यहां पुलिस का कब्जा माना जा रहा था, लेकिन इसके ठीक 25 दिन बाद झारखंड जगुआर के तीन जवानाें को रॉकेट लॉन्चर से उड़ाकर माओवादियाें ने अपनी ताकत दिखाई। ऐसे ही जुगाड़ राॅकेट लाॅन्चर का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ हमले में भी हुआ। माना जा रहा है कि महाराज प्रमाणिक के अलावा एक कराेड़ का इनामी नक्सली नेता पतिराम माझी उर्फ अनल दा का फिर से पहाड़ पर कब्जा हाे चुका है। इनके साथ 100 से ज्यादा नक्सली हैं।
इसका ताजा प्रमाण बीते बुधवार काे ही इस दस्ते द्वारा लांजी पहाड़ तक सड़क बना रही ठेका कंपनी की आठ गाड़ियाें काे फूंक देना है। नक्सलियों का खौफ इतना था कि पहाड़ी के नीचे 20 घंटे के बाद भी पुलिस गाड़ियाें काे देखने नहीं पहुंची। घटनास्थल से महज आधा किमी दूर सैप के कैंप से 24 घंटे बाद भी कोई नहीं पहुंचा।
हालांकि जिले के एसपी अजय लिंडा घटनास्थल तक पहुंचे, लेकिन पैदल ही। पुलिस मान रही है कि फाेर्स काे छत्तीसगढ़ की तर्ज पर निशाना बनाने के लिए नक्सली उन्हें ऐसी घटनाओं से पहाड़ी पर आने का निमंत्रण दे रहे हैं। जबकि महीने भर तक पहाड़ी के आसपास तैनात 2000 से ज्यादा पुलिस हटा दी गई है। इधर, नक्सलियों की घटना से गांव के लोग बेफिक्र हैं। जिस रास्ते पर गाड़ियां जलाई गईं, उसी रास्ते से गुजरते ग्रामीणों ने कहा कि डर किससे और क्याें।
Previous article
Next article


Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें