बोकारो / झारखंड के बोकारो जिले के संताली बहुल गांव असनापानी में आज भी 'खाट' पर है स्वास्थ्य व्यवस्था, आदिम युग में जीने को हैं मजबूर ग्रामीण
बोकारो न्यूज : झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र सिंयारी पंचायत के संताली बहुल गांव असनापानी के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के मोहताज हैं. आजादी के सात दशक और झारखंड गठन के दो दशक बाद भी ये सड़क के अभाव में खाट पर मरीजों को इलाज के लिए ले जाने पर मजबूर हैं.
एक बुजुर्ग महिला बंधनी देवी (पति स्व डेंगरा मांझी) को इलाज के लिए खाट पर लादकर पांच किलोमीटर दूर दनिया ले गये, ताकि वहां से इलाज के लिए रामगढ़ ले जाया जा सके, लेकिन कोरोना के भय से किसी ने सहयोग नहीं किया, तो मरीज वापस गांव ले आये. अब जड़ी-बूटी से इलाज चल रहा है.
ग्रामीणों ने बताया कि इसी प्रकार प्रसव के वक्त महिलाओं को खाट पर ले जाना पड़ता है. गोमिया प्रखंड के गांवों में ज॔हां सड़कों का अभाव है, वहीं बिजली की भी सुविधा नहीं है. इस कारण आज भी ग्रामीण आदिम युग में जीने को विवश हैं. आपको बता दें कि असनापानी गांव में 15 आवास संताली परिवार के हैं, जो पहाड़ी में हैं.
गोमिया प्रखंड में एक मात्र गांव है, जहां बिजली नहीं पहुंच पायी है. यहां स्कूल भी नहीं है. यहां के ग्रामीण अपने छोटे-छोटे बच्चों के लिए एक आंगनबाड़ी केन्द्र के संचालन करने की मांग कर रहे हैं. पढ़ाई के लिए तीन किलोमीटर दूर बिरहोर डेरा गांव में स्कूल है, वहीं बच्चे जाते हैं.
बिरहोर डेरा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि इसी प्रकार निकट के संताली बहुल गांव काशी टांड़ व बिरहोर डेरा गांव में तकनीकी गड़बड़ी के चलते पिछले छह माह से बिजली नहीं है.


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