बड़ा हादसा टला:रांची एयरपोर्ट से मुंबई के लिए 164 यात्रियों को लेकर उड़े विमान से पक्षी टकराया, तकनीकी खराबी आई; 55 मिनट के बाद सुरक्षित लैंडिंग : रांची
रांची से मुंबई के लिए उड़ान भरे विमान से मंगलवार को पक्षी टकरा गया, लेकिन पायलट की सूझबूझ से उसमें बैठे 164 यात्री बाल-बाल बच गए। 55 मिनट के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से बात करने के बाद पायलट ने विमान की रांची एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कराई। पक्षी के टकराने से विमान में तकनीकी खराबी आ गई है। उसे ग्राउंडेड कर दिया गया है।
वहीं शाम पांच बजे कोलकाता से दूसरा विमान बुलाया गया।
शाम 5.30 बजे सभी यात्रियों को लेकर विमान मुंबई के लिए रवाना हुआ। एयरपाेर्ट डायरेक्टर विनाेद शर्मा ने बताया कि इंडिगो का विमान 164 यात्रियों को लेकर दाेपहर 2:10 बजे मुंबई के लिए रवाना हुआ। अचानक पायलट काे विमान के इंजन में कुछ टकराने की आवाज सुनाई दी। इंजन ठीक से काम नहीं करने लगा तो पायलट ने एटीसी से संपर्क किया और विमान में तकनीकी खराबी आने की बात कही।
एटीसी ने पायलट को वापस लौटते ही रांची एयरपोर्ट पर लैंडिंग की बात कही। इसके बाद दाेपहर 3:05 बजे विमान सुरक्षित लैंड किया। विमान में आई तकनीकी खराबी को दूर करने का प्रयास किया गया, लेकिन ठीक नहीं हो सका।
इस साल बर्ड हिट का पहला मामला
इस साल रांची में बर्ड हिट का यह पहला मामला है। नौ महीने पहले 11 अगस्त-2020 को बर्ड हिट हुआ था। उस समय भी इंडिगो के विमान से ही पक्षी टकराया था। विमान ने रांची से मुंबई के लिए ही उड़ान भरी थी। उससे पहले रांची से मुंबई जा रहे एयर एशिया के विमान के उड़ान भरते ही एक पक्षी टकरा गया था, जिसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी।
मांस-मछली की दुकानों के कारण बर्ड हिट के मामले
एयरपोर्ट के आसपास बाजार लगते हैं। इनमें मांस-मछली की दुकानें भी रहती हैं। इस कारण चील, कौओं समेत कई पक्षी एयरपोर्ट के आसपास मंडराते रहते हैं। बर्ड हिट के मामले होने का सबसे बड़ा कारण यही है। हालांकि, कई बार मांस-मछली की दुकानों को हटाने का अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ दिन हटे रहने के बाद फिर से मांस-मछली विक्रेता दुकानें लगाने लगते हैं।
नगर निगम अफसर भी जिम्मेदार
एयरपोर्ट के तीन किमी दायरे में नहीं लगनी है मांस-मछली की दुकानें
एयरपोर्ट के 3 किमी के दायरे में मांस-मछली की दुकानें नहीं लगाई जानी हैं। इसकी जिम्मेदारी रांची नगर निगम पर है। निगम के अफसरों को इसे लेकर नियमित रूप से अभियान चलाना है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बर्ड हिट के मामले सामने आते हैं तो अफसर कुछ दिन अभियान चलाकर सख्ती बरतते हैं, फिर शांत बैठ जाते हैं।


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