कोवैक्सिन को इंटरनेशनल अप्रूवल में देरी:अमेरिकी ड्रग अथॉरिटी का इमरजेंसी अप्रूवल देने से इनकार, भारत बायोटेक के सामने अब बायोलॉजिकल लाइसेंस का ऑप्शन : नई दिल्ली - AKB NEWS

कोवैक्सिन को इंटरनेशनल अप्रूवल में देरी:अमेरिकी ड्रग अथॉरिटी का इमरजेंसी अप्रूवल देने से इनकार, भारत बायोटेक के सामने अब बायोलॉजिकल लाइसेंस का ऑप्शन : नई दिल्ली

भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन को इंटरनेशनल अप्रूवल मिलने में देरी हो सकती है। अमेरिका में कोरोना के मामले कम होने के बाद अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) ने कोवैक्सिन को इमरजेंसी अप्रूवल देने से इनकार कर दिया है। USFDA किसी भी नई वैक्सीन को अप्रूवल देने के मूड में नहीं है।

अब कोवैक्सिन बनाने वाली भारत बायोटेक कंपनी के सामने बायोलॉजिकल लाइसेंस लेने का ऑप्शन रह गया है। कोवैक्सीन लगवाने वाले लोगों को कई देशों का वीजा न मिलने के विवाद के बाद कंपनी ने सफाई दी है। भारत बायोटेक ने कहा कि वे बायोलॉजिकल लाइसेंस लेने की कोशिश कर रहे हैं। ये एक तरह से अप्रूवल ही माना जाता है। इसकी प्रोसेस उनकी सहयोगी कंपनी ऑक्यूजेन इंक करेगी।

14 देश दे चुके हैं इमरजेंसी अप्रूवल
कंपनी को बायोलॉजिकल लाइसेंस लेने के लिए एडिशनल क्लीनिकल ट्रायल करने होंगे। बता दें कि ईरान, फिलीपींस, मॉरीशस, मेक्सिको, नेपाल, गुयाना, पराग्वे और जिंबाब्वे सहित 14 देश कोवैक्सिन को इमरजेंसी अप्रूवल दे चुके हैं, जब कि 50 देशों में कंपनी की अर्जी लंबित है। भारत बायोटेक की सहयोगी ऑक्यूजेन इंक के सीईओ शंकर मुसुनूरी ने कहा कि हम बायोलॉजिकल लाइसेंस के लिए अर्जी दाखिल करने के बेहद करीब हैं।

वैक्सीन पासपोर्ट जारी करने की चल रही बात
दरअसल, अब धीरे-धीरे कई देश वैक्सीन लगवा चुके लोगों को एंट्री दे रहे हैं। कई देशों के बीच में तो अलग से वैक्सीन पासपोर्ट जारी करने की बात भी चल रही। ऐसे में कोवैक्सिन के लिए अंतररराष्ट्रीय मान्यता हासिल करना बेहद जरूरी है।

फेज-3 ट्रायल्स का डाटा शेयर न करने पर हुई थी आलोचना
भारत बायोटेक से जुड़ा विवाद तब सामने आया था, जब फेज-3 ट्रायल्स का डाटा शेयर न करने पर कंपनी की आलोचना की गई थी। इसके 6 महीने पहले ही कोवैक्सिन को भारत में इमरजेंसी अप्रूवल की मंजूरी मिल चुकी थी। जनवरी में हुई इस घटना के बाद कंपनी ने कहा था कि वह मार्च तक अपना डाटा सार्वजनिक करेंगे। दो दिन पहले कंपनी ने डाटा जुलाई में जारी करने की बात कही है। जैसे ही तीसरे फेज का डाटा जारी किया जाएगा, कंपनी फुल लाइसेंस के लिए भी अप्लाई कर देगी।

पहली डोज के बाद कोवीशील्ड ज्यादा एंटीबॉडी बना रही
कुछ दिन पहले एक स्टडी में दावा किया गया था कि स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन के मुकाबले कोवीशील्ड पहली डोज के बाद ज्यादा एंटीबॉडी बनाने में सक्षम है। कोरोना वायरस वैक्सीन-इंड्यूस्ड एंडीबॉडी टाइट्रे (COVAT) की ओर से की गई शुरुआती स्टडी में इसका दावा किया गया। स्टडी में 552 हेल्थकेयर वर्कर्स को शामिल किया गया था। स्टडी में दावा किया गया कि कोवीशील्ड वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में सीरोपॉजिटिविटी रेट से लेकर एंटी-स्पाइक एंटीबॉडी की मात्रा कोवैक्सिन की पहली डोज लगवाने वाले लोगों की तुलना में काफी ज्यादा थी।

सीरोपॉजिटिविटी रेट और एंटी स्पाइक एंटीबॉडी कोवीशील्ड में अधिक
स्टडी में कहा गया कि दोनों डोज के बाद कोवीशील्ड और कोवैक्सिन दोनों का रिस्पॉन्स अच्छा था, लेकिन सीरोपॉजिटिविटी रेट और एंटी स्पाइक एंटीबॉडी कोवीशील्ड में अधिक था। पहली डोज के बाद ओवरऑल सीरोपॉजिटिविटी रेट 79.3% रहा। सर्वे में शामिल 456 हेल्थकेयर वर्कर्स को कोवीशील्ड और 96 को कोवैक्सिन की पहली डोज दी गई थी।

दोनों वैक्सीन का इम्यून रिस्पॉन्स अच्छा
हालांकि, स्टडी के निष्कर्ष में कहा गया कि दोनों वैक्सीन लगवा चुके हेल्थकेयर वर्कर्स में इम्यून रिस्पॉन्स अच्छा था। COVAT की चल रही स्टडी में दोनों वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद इम्यून रिस्पॉन्स के बारे में और बेहतर तरीके से रोशनी डाली जा सकेगी।

 

Previous article
Next article

Leave Comments

एक टिप्पणी भेजें

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads