2200 का बालू आपको मिलता है 6000 में, क्योंकि... एनजीटी की पाबंदी में 7 थानों का फिक्स है ‘चढ़ावा’
पहले किल्लत दिखाकर बालू की सिर्फ कालाबाजारी होती थी, लेकिन अब तस्करी हो रही है। रांची का बालू बिहार भेजा रहा है, वह भी कंटेनर से। सारा खेल पुलिस-प्रशासन और बालू माफिया की मिलीभगत से चल रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जैसे ही 15 जून से नदी से बालू उत्खनन पर रोक लगाई,
बालू तस्करी बढ़ गई। बुंडू के दशम थाना क्षेत्र में कांची नदी के आरहहातू घाट सहित सोनाहातू, सिल्ली के अन्य अन्य घाटों से रोज 500 ट्रैक्टर बालू नदी खोदकर निकाला जा रहा है। इस धंधे में शामिल लोगों की मानें तो रोक के बावजूद रोज करीब 20 लाख रुपए का बालू बेचा जा रहा है। यानी एक माह में 6 करोड़ रुपए का अवैध धंधा चल रहा है।

लाइसेंस न परमिशन... सीधे नदी खोदकर बालू निकलवा रहे माफिया
बुंडू के दशम, आरहहातू आदि घाटों से नदी खोदकर रोजाना 300 ट्रैक्टर से अधिक बालू निकाला जा रहा है। इसमें स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हैं। सुकरा मुंडा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि रात में डंपर और कंटेनर में बालू बिहार भेजा जाता है। प्रशासन की कड़ाई से अभी बालू का उठाव कम हो गया है।
स्टॉक दिखाने को...सोनाहातू में नदी से बालू निकालने काे बन रहा रास्ता
सोनाहातू के गोमियाडीह, सलगाडीह और हरीन घाट पर बालू का बड़ा स्टॉक है। यहां आनंद ट्रेडर्स ने लाइसेंस लिया है। नदी तक पहुंचने वाले रास्ते में दोनों ओर बालू स्टॉक किया है। फिर भी घाट के एक ओर नदी से बालू निकालने के लिए रास्ता बनाया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीण रवि महतो (बदला हुआ नाम) ने बताया कि स्टॉक मेंटन करने के लिए घाटों से चोरी-छिपे रोजाना 200 ट्रैक्टर से अधिक बालू निकलता है।
माफिया का खौफ...जंगल के बीच हैं बालू घाट, पुलिस भी नहीं पहुंच पाती
बालू घाट चाहे सोनाहातू का हो या बुंडू के पास दशम का। दोनों काफी अंदर जंगल के बीच है। नक्सल प्रभावित इलाका होने के कारण पुलिस भी नहीं जाती। नक्सलियों से साठगांठ कर माफिया इसका फायदा उठाते हैं । खनन विभाग कहता है कि खनन बंद है। लेकिन बारिश में भी धड़ल्ले से नदी से खनन जारी है। इस धंधे में खनन विभाग से लेकर पुलिस के आला अधिकारी तक शामिल हैं।
from Dainik Bhaskar

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