18 साल बाद बदलेगा झारखंड का लोगो; चौकोर नहीं अब गोलाकार बीच में अशोक स्तंभ, सौरा चित्रकारी, हाथी और पलाश के फूल
झारखंड का राज्य चिह्न (स्टेट लोगो) 15 अगस्त से बदल जाएगा। 18 साल पहले 26 फरवरी 2002 को अधिसूचित वर्तमान राज्य चिह्न में हेमंत सोरेन सरकार ने कई त्रुटियां बताकर बदलाव करने की बात कही है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में बुधवार को इसे मंजूरी दे दी गई।
नया राज्य चिह्न वृताकार होगा, जिसे राज्य की प्रगति का प्रतीक माना गया है। इसमें राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ, हरा रंग, हाथी, पलाश के फूल और सौरा चित्रकारी अंकित किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि हेमंंत सोरेन ने 29 दिसंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपनी कैबिनेट में राज्य चिह्न बदलने का निर्णय लिया था। 205 दिनों के बाद कैबिनेट ने नए राज्य चिह्न बदलने पर मुहर लगाई है। लगभग 200 दिनों की मेहनत के बाद इसे तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने अपने मार्गदर्शन में अपनी टीम से इसे तैयार कराया है।
जानिए... वर्तमान और नए राज्य चिह्न में अंतर

यह वर्गाकार है। बीच में अशोक चक्र अंकित है।
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा से नीले रंग का अशोक चक्र लिया गया है।
अशोक चक्र चार जे अक्षर से घिरा है। ये चार जे क्लॉकवाइज अंकित हैं।
पहला जे अक्षर झारखंड को प्रतिबिंबित करता है। वहीं तीन जे अक्षर जल, जंगल और जमीन के प्रतीक के रूप में है।
हरा रंग राज्य की हरियाली को दर्शाता है।

वृताकार है, जिसमें प्रत्युक्त हरा रंग झारखंड की हरी-भरी धरती और वन संपदा को प्रतिबिंबित करता है।
चारों ओर दर्शाए गए हाथी राज्य के ऐश्वर्य, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और समृद्धि के द्योतक हैं।
पलाश के फूल राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य का परिचायक हैं।
वृत्ताकार खंडों के बीच सौरा चित्रकारी राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की द्योतक है।
चक्र के मध्य में राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ है, जो देश के विकास में झारखंड की भागीदारी को प्रदर्शित करता है।
from Dainik Bhaskar

Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें