हड़ताल से मनरेगा में काम कर रहे मजदूरों की संख्या 5 लाख से घटकर ढाई लाख हुई - AKB NEWS

हड़ताल से मनरेगा में काम कर रहे मजदूरों की संख्या 5 लाख से घटकर ढाई लाख हुई

राज्य और देश स्तर पर प्रवासी मजदूरों के लिए सबसे बड़ा सहारा माना जा रहा मनरेगा झारखंड में स्वयं बीमार हो गया है। मनरेगा कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से सबसे ज्यादा प्रभाव मनरेगा मजदूरों पर ही पड़ा है। मॉनिटरिंग नहीं होने से योजनाएं भी लगभग धीमी हो चुकी हैं। अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होने के पहले 26 जुलाई को मनरेगा में काम कर रहे मजदूरों की संख्या करीब पांच लाख थी। अब हड़ताल के पांचवें दिन यह संख्या घट कर 2.68 लाख तक सिमट गई है।

एक ओर आंदोलनकारी हड़ताल पर डटे हुए हैं। दूसरी ओर मंत्रालय की ओर से भी अब सख्ती का दौर शुरू हो सकता है। ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने हड़ताल को यह कहते हुए गलत करार दिया है कि उचित समय नहीं है। सखी मंडलों को जिम्मेदारी... मनरेगा योजनाओं की मॉनिटरिंग व अन्य कार्यों के लिए सखी मंडल को जिम्मेदारी देने की पहल विभाग द्वारा की जा रही है।

ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से सीधी बातचीत

सरकार ने मनरेगा कर्मियों की मांग क्यों नहीं मानी, हड़ताल हो गई, कौन जिम्मेदार है?
जबाव : कोविड-19 के इस संक्रमण काल में किसी भी तरह की हड़ताल करना उचित नहीं है। वह भी गरीबों को रोजगार देने वाली योजना की मॉनिटरिंग करने वाले लोगों द्वारा तो ऐसा कतई नहीं किया जाना चाहिए था। हड़ताल करने का यह समय कहीं से भी उचित नहीं है। अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के कम से कम 15 दिन पहले इसकी नोटिस विधिवत दी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसकी वजह से मांगों पर विचार करने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाया।
सरकार मनरेगा कर्मियों की मांग मानने को किस हद तक तैयार है?
जवाब : सरकार मनरेगा कर्मियों की हर जायज मांग मानने को तैयार है।
हड़ताली मनरेगा कर्मियों पर दबाव बनाने के लिए उन्हें हटाने या उनका काम दूसरे लोगों को सौंपने की कार्रवाई की जा रही है?
जवाब : मनरेगा कर्मियों पर किसी भी तरह का दबाव बनाने की मंशा सरकार की नहीं है। सरकार तो अब भी उनसे काम पर लौटने की अपील कर रही है। लेकिन अगर वे नहीं लौटते हैं, तो मनरेगा के जो काम बाधित हो रहे हैं, उन्हें सुचारू रखने के लिए विकल्प तलाशना जरूरी है।
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल निकट भविष्य में खत्म होने की क्या संभावना है?
जवाब : सभी मनरेगा कर्मी हड़ताल पर नहीं रहना चाहते हैं। काफी लोग वापस लौटने की इच्छा जता रहे हैं। इंजीनियरों ने भी हड़ताल से वापस आने की बात कही है। ऐसे में निकट भविष्य में हड़ताल खत्म हो सकती है।

सवाल : सरकार की ओर से हड़ताल समाप्त करने का प्रयास क्यों नहीं किया जा रहा है?
जवाब : हड़ताल समाप्त कराने का प्रयास लगातार जारी है। पहले भी मैंने 3 दिन तक हड़ताल समाप्त करने की अपील की। उनसे वार्ता का भी प्रयास किया, लेकिन वे अड़े हुए हैं। जबकि उनकी मांगों पर निर्णय लेने के लिए विचार-विमर्श करना होगा, जिसमें थोड़ा समय लग सकता है।

इधर, विभागीय सचिव का निर्देश...सभी स्थानीय-प्रवासी मजदूरों को मनरेगा में दिया जाए काम

प्रखंड स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकास आयुक्तों के साथ ही प्रखंड विकास पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश शुक्रवार को दिए गए। ग्रामीण विकास विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने कहा है कि मनरेगा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत काम शुरू कर श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराएं। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी को अविलंब मस्टर रोल को एमआईएस में अपडेट करने को भी कहा।

जिस पंचायत में योजनाएं बंद मिलेंगी, वहां अफसरों पर कार्रवाई : मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी ने वैसे गांव जहां योजनाएं संचालित नहीं हो रही हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम करने को कहा। चेतावनी दी कि जिस प्रखंड, पंचायत एवं गांव में योजनाएं बंद पाई जाएंगी, संबंधित अधिकारी एवं कर्मियों पर जवाबदेही तय करते हुए सीधी कार्रवाई की जाएगी।






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