कतरास और छाताटांड़ के 13 वार्डों में पहुंचाना था पीने का पानी, अमृत जलापूर्ति योजना पर लगा ब्रेक
पहले 20 हजार एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाने पर राेक, उसके बाद आठ लेन की सड़क के निर्माण पर राेक और अब अम्रृत जलापूर्ति याेजना पर भी संकट मंडराने लगा है। अघाेषित रूप से इस याेजना पर भी राेक लगा दी गई है। हालांकि, नगर निगम के अधिकारी और कंसल्टेंट कंपनी के प्रतिनिधि याेजना पर राेक की बात से इनकार कर रहे हैं। वहीं, कतरास क्षेत्र के पूर्व पार्षदाें ने जलापूर्ति का काम ठप हाे जाने की बात काे स्वीकार किया है।
पूर्व पार्षदाें का कहना है कि पांच माह से याेजना का काम पूरी तरह से ठप है। इस दाैरान एक बार भी न ताे निगम के अफसर और न ही कंसल्टेंट कंपनी के प्रतिनिधि कार्यस्थल का निरीक्षण करने गए। सूत्राें के मुताबिक, जलापूर्ति याेजना का काम बंद करने का अब तक काेई सरकारी आदेश नहीं आया है, लेकिन याेजना का काम देख रही श्रीराम ईपीसी कंपनी के भुगतान पर राेक लगा दी गई है। इसकी पुष्टी कंसल्टेंट कंपनी के डीजीएम ने भी की है।
जांच के दायरे में जलापूर्ति याेजना काम देख रही कंपनी
जलापूर्ति याेजना काम देख रही श्रीराम ईपीसी कंपनी जांच के दायरे में आ गई है। वार्ड 10 में पाइप के ऊपर पाइप बिछा देने के मामले में विभागीय स्तर पर जांच शुरू हाे गई है। सूत्राें के मुताबिक, जांच के लपेटे में आने के कारण विभाग ने कंपनी के भुगतान पर भी राेक लगा दी है।
कंपनी के प्राेजेक्ट इंचार्ज मदन गाेपाल ने माना कि काम की रफ्तार काफी धीमी है, लेकिन काम पर राेक लगाए जाने की बात से इनकार किया। उन्हाेंने कहा कि काेराेना संक्रमण की वजह से बाहर से मजदूर आ नहीं आ पा रहे हैं। इसी वजह से काम प्रभावित हाे रहा है। पाइप के ऊपर पाइप बिछाने की जांच पूर्व नगर आयुक्त चंद्रमाेहन कश्यप ने भी की थी और आराेप काे सही पाया था।
from Dainik Bhaskar

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