शहर में कंटेनर डिपो, वेयर हाउस और कस्टम इंटरफेस नहीं, निर्यात प्रभावित, प्रशासन ने की जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठक
डीडीसी परमेश्वर भगत की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठक शुक्रवार को हुई। उपनिदेशक डीजीएफटी आनंद मोहन मिश्रा ने कहा- पूर्वी सिंहभूम में निर्यात की विशाल संभावना है। क्षेत्र में स्थापित ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट इंडस्ट्री एवं स्टील इंडस्ट्री पहले से ही उत्पाद का निर्यात कर रही हैं। बैठक में उक्त उत्पादों के साथ अन्य उत्पाद की पहचान करने पर विमर्श किया गया, जिसके निर्यात को प्रोत्साहित किया जा सके। टाटा स्टील के प्रतिनिधि सूर्या लेंका ने कहा- जमशेदपुर में निर्यात से संबंधित आधारभूत संरचना की कमी है।
इनलैंड कंटेनर डिपो के अभाव में कंटेनर मोड में निर्यात करने से आने वाला खर्च बढ़ता है। यदि जिले में आईसीडी स्थापित होता है तो कार्गो का एक स्थान पर एकत्र करना आसान होगा। सड़क मार्ग पर निर्यात निर्भरता कम होगी, जिससे निर्यात करना सस्ता व सुविधाजनक होगा। वेयर हाउस का जिले में अभाव होने से हल्दिया व कोलकाता पोर्ट पर निर्यातकों की निर्भरता बढ़ती है। कस्टम इंटरफेस की जिले में आवश्यकता होने की बात सामने आई। उप निदेशक ने कहा -इसपर विचार करना चाहिए कि आईसीडी प्रारंभ करने की योजना क्यों विफल हुई, उनका सुझाव था कि यदि अधिक से अधिक इकाइयां आईसीडी से एक्सपोर्ट करती हैं तो इससे परिचालन व्यय में कमी आएगी। टाटा कमिंस के प्रतिनिधि ने कहा- कंपनी द्वारा ऑटो इंजन का निर्यात होता है, परंतु चेन्नई-मुंबई की तुलना में कोलकाता का टर्न अराउंड टाइम अधिक होने से निर्यात में दिक्कत होती है। कच्चे माल-मजदूरी में भारत चीन से आगे है, परन्तु टैैरिफ कॉस्ट और आधारभूत संरचना का अभाव है। टाटा ब्लूस्कोप के प्रतिनिधि पीयूष कुमार ने कहा- इकाई द्वारा प्रतिवर्ष 8000 से 9000 कलर कोटेड स्टील का निर्यात होता है।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से निर्यात प्रभावित
खेतान इंटरप्राइजेज के प्रतिनिधि ने कहा-डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से निर्यात में दिक्कत हो रही है। बांग्लादेश सीमा पर वाहनों के अनावश्यक रोकने से निर्यात वस्तुओं के खराब होने की संभावना होती है। उपनिदेशक डीजीएफटी ने सभी इकाइयों से अनुरोध किया है कि वे सभी अपनी इकाइयों द्वारा किए जाने वाले निर्यात में आने वाली कठिनाइयों के बारे में महाप्रबंधक-जिला उद्योग केंद्र चाईबासा को व उन्हें ईमेल करें। ताकि समस्या व सुझाव को उद्योग विभाग को बता सके। टाटा स्टील लिमिटेड के प्रतिनिधि ने कहा- बांग्लादेश में निर्यात करने हेतु सड़क मार्ग, भारत-बांग्लादेश नदी मार्ग व अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माध्यम है, टाटा स्टील भारत-बांग्लादेश नदी मार्ग का उपयोग कर रहा है व यदि किसी इकाई को निर्यात से संबंधित सहायता की चाहिए तो टाटा स्टील मदद कर सकता है।
कहां क्या दिक्कत
- बांग्लादेश सीमा पर वाहनों के अनावश्यक रोके जाने के कारण खराब होता है सामान
- कंटेनर डिपो नहीं होने के कारण निर्यात करने में बढ़ता है कंपनी का खर्च
- माल-मजदूर होने के बावजूद आधारभूत संरचना में भारी कमी के कारण हो रही परेशानी
from Dainik Bhaskar

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