शहरी जलापूर्ति व्यवस्था जल्द नगर निगम के हवाले हाेगी, जलमीनाराें काे पहले डीडब्ल्यूएसडी अपने अधीन लेगा, फिर निगम काे साैंप देगा
शहरी जलापूर्ति याेजना फेज 2 से जुड़ी पूरी व्यवस्था जल्द नगर निगम के जिम्मे हाेगी। इस याेजना के तहत तैयार हाे चुकीं 30 जलमीनारों काे पहले पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडब्ल्यूएसडी) अपने अधीन लेगा और फिर इनमें से शहरी क्षेत्र की जलमीनाराें काे नगर निगम को सौंप देगा।
डीसी उमाशंकर सिंह की माैजूदगी में मंगलवार काे समाहरणालय में नगर निगम और डीडब्ल्यूएसडी के अधिकारियाें की बैठक में यह निर्णय हुआ। नगर आयुक्त सत्येंद्र कुमार ने डीसी काे बताया कि जामाडाेबा में बने ट्रीटमेंट प्लांट से नियमित जलापूर्ति नहीं हाे पा रही है। इस वजह से बड़ी आबादी जलसंकट का सामना करने काे मजबूर है।
प्लांट में तैनात निजी एजेंसी एल एंड टी की ओर से दाे-चार दिनाें तक जलापूर्ति ठीक-ठाक की जाती है, लेकिन फिर अचानक ठप कर दी जाती है। अगर डीडब्ल्यूएसडी इस पूरी व्यवस्था काे अपने अधीन ले ले, ताे फिर इसे नगर निगम काे साैंपना आसान हाे जाएगा। बैठक में डीडब्ल्यूएसडी के ईई मनीष बर्णवाल भी माैजूद थे। यह भी तय हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व यूजर चार्ज वसूली की जिम्मेवारी डीडब्ल्यूएसडी के पास ही रहेगी।
7 लाख की आबादी तक पेयजल पहुंचाने के काम में तेजी आएगी
अगर पूरी व्यवस्था नगर निगम के हाथाें में आ जाएगी, ताे 7 लाख आबादी तक पीने का साफ पानी पहुंचाने के काम में तेजी आएगी। अभी निगम, डीडब्ल्यूएसडी और नगर विकास विभाग के बीच तालमेल में कमी और निजी एजेंसी एल एंड टी से समन्वय में कमी की वजह से जलापूर्ति भी अनियमित हाे रही है और नए वाटर कनेक्शन भी नहीं दिए जा रहे हैं।
अभी सिर्फ 20 हजार घरों में वाटर कनेक्शन : शहरी जलापूर्ति याेजना फेज 2 के तहत पुटकी, मुनीडीह, भागाबांध, पेटिया, कच्छी बलिहारी, लायाेबाद, सिजुआ, कतरास और आसपास की करीब 7 लाख अाबादी तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। अब भी इनमें से कई इलाकाें में पानी सप्लाई हाे रही है, लेकिन अभी करीब 20 हजार घराें में ही वाटर कनेक्शन दिए जा सके हैं।

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