आईआईएम ने बताए 5 सेक्टर जो 2021 में झारखंड के लिए हो सकते हैं गेम चेंजर - AKB NEWS

आईआईएम ने बताए 5 सेक्टर जो 2021 में झारखंड के लिए हो सकते हैं गेम चेंजर

झारखंड के 20वें स्थापना दिवस पर आईआईएम रांची ने दैनिक भास्कर को 2021 में राज्य के विकास का रोडमैप बताया। अपनी स्टडी में पांच ऐसे सेक्टर बताए जो अगले साल झारखंड की इकोनॉमी बढ़ाने मेंे सहायक हो सकते हैं। आईआईएम रांची के निदेशक डॉ. शैलेंद्र सिंह और उनकी टीम में शामिल प्रो. साक्षी झा ने टूरिज्म को राज्य का पोटेंशियल कोर सेक्टर बताया।

टीम के अनुसार टूरिज्म में 1:7 का मॉडल माना जाता है। यही मॉडल झारखंड में लागू हो तो टूरिज्म में 1% ग्रोथ 7 सेक्टर को विकसित कर सकता है। इनमें ट्रांसपोर्ट, होटल, टूर एंड ट्रैवल, फूड, हैंडीक्राफ्ट, वुडक्राफ्ट, लोकल मार्केट शामिल हैं।

न्यू नॉर्मल: टूरिज्म सेक्टर बदल सकता है झारखंड का भविष्य, चार अन्य सेक्टर से बढ़ेगा रोजगार

पर्यटन के साथ बढ़ेंगे ट्रांसपोर्ट, होटल बिजनेस, फूड, हैंडी-वुड क्राफ्ट सेक्टर

झारखंड की जीडीपी में टूरिज्म का योगदान 1% से कम है। अगर 2021 में 1% भी बढ़े तो अलग-अलग सात क्षेत्रों की इकोनॉमी भी बढ़ेगी। उत्तराखंड की जीडीपी 1.82 लाख करोड़ है, पर इसमें टूरिज्म का हिस्सा 10% है। हमारी जीडीपी 3.83 लाख करोड़ की है, अगर हम टूरिज्म बजट 1% बढ़ाएं तो इसका प्रभाव 7 क्षेत्रों में ग्रोथ के रूप में दिखेगा।

फोकस एरिया : माइनिंग टूरिज्म, रिलिजियस टूरिज्म, ईको टूरिज्म, रूरल टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म
यह करना होगा: एफडीआई, आर्कियोलॉजिकल साइट डेवलप, कच्छ होडका मॉडल

ऑनलाइन मॉडल बेरोजगारी दर कम करेगा, महिलाओं को घर बैठे रोजगार

कोरोना के बाद ऑनलाइन मार्केटिंग का नया दौर आया है। इससे झारखंड के सामान को बाजार मिलने के साथ रोजगार भी बढ़ेगा। राज्य की बेरोजगारी दर 7.7% है जो देश की बेरोजगारी दर 6.1% से अधिक है। इसे ऑनलाइन बिजनेस ठीक करेगा। कुटीर उद्योग को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मिला तो महिलाएं घर बैठे रोजगार पाएंगी।

फोकस एरिया : तसर सिल्क, हैंडीक्राफ्ट, जनजातीय आभूषण।
यह करना होगा: ऑनलाइन ईकोसिस्टम, जैविक उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री, पारंपरिक खाद्यान्नों का व्यवसायीकरण।

माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के साथ यहां विदेशी निवेश भी बढ़ाना होगा

वर्ष 2011 से 2020 तक इस क्षेत्र में 38.5% की वृद्धि हुई। झारखंड की जीडीपी में 3.9% का योगदान रहा। यहां विदेशी निवेश भी देश के मुकाबले 1% कम हुआ। महाराष्ट्र में 26% राजस्व उद्योग से ही आता है। बड़े माइनिंग व मैन्युफैक्चरिंग के साथ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज हमें बढ़ाने होंगे।

फोकस एरिया : हैंडीक्राफ्ट, सिविंग इंडस्ट्री, ऑटोमोटिव-पार्ट्स इंडस्ट्री, फिस फार्मिंग, वेजिटेबल-फ्रूट्स एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज।

यह करना होगा: स्पेशल इकोनोमिक जोन, कंपनी को इंसेंटिव।

स्किल्ड मैनपावर बड़ा इकोनॉमी चेंजर, इससे ब्रेन ड्रेन भी रुकेगा

साक्षरता दर कम होने से झारखंड की बड़ी आबादी दूसरे राज्यों में मजदूर बनकर जा रही है। हालांकि समृद्ध बच्चे पढ़ाई के लिए देश-विदेश जा रहे हैं तो ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा पलायन) से अरबों रुपए बाहर जा रहे हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर हम स्किल्ड मैनपावर तैयार कर सकते हैं। निवेश बढ़ने से भी यह बड़ा राजस्व वाला सेक्टर बन सकता है।

फोकस एरिया: ओपन लर्निंग सोर्स, एजुकेशनल प्लेटफॉर्म बनाना होगा, स्किल डेवलपमेंट के लिए कैप्सूल कोर्सेज जरूरी।

यह करना होगा: टीचर्स ट्रेनिंग, प्रोफेशनल शॉर्ट टर्म कोर्स।

हमारी जीडीपी में 7.5% योगदान का दायरा फूड प्रोसेसिंग से टूटेगा

झारखंड में सबसे अधिक रोजगार कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में है। वर्ष 2019-20 की जीडीपी में कृषि का योगदान 15% है, जबकि जीएसडीपी में वर्ष 11-12 से अबतक इस सेक्टर का योगदान 7.5% रहा है। यहां फूलों और सब्जियों की अच्छी खेती हो रही है, पर फूड प्रोसेसिंग, हॉर्टिकल्चर और पशुपालन से योगदान बढ़ सकता है।

फोकस एरिया : फूड प्रोसेसिंग, मसाला, चाय, औषधीय पौधे के उत्पादन को बढ़ावा, गांवों में को-ऑपरेटिव का सशक्तीकरण।

यह करना होगा: किसानों को ट्रेनिंग, सस्ता ऋण देना होगा।




Previous article
Next article

Leave Comments

एक टिप्पणी भेजें

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads