छठ पूजा काे लेकर सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का महाविरोध, झारखंड सरकार का आदेश हिंदू आस्था के खिलाफ, इसे हरगिज बर्दाश्त नहीं करेंगे
इस बार 18 नवंबर को नहाय खाए के साथ लोक आस्था का पर्व छठ शुरू हो रहा है। 19 को खरना, 20 को डूबते सूर्य को और 21 नवंबर को उगते हुए सूर्य अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं महापर्व को लेकर झारखंड सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का हिंदू संगठनों व राजनीतिक दलों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। कोई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंक रहा है तो कोई हिंदू आस्था के विरुद्ध बताते हुए कहा कि सरकार का तुगलकी फरमान बता रहा है जो हरगिज बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नवयुवक चेतना मंच ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी है कि छठ पूजा तो घाट पर ही होगा। देखते ही देखते यह ट्रेंड बड़ा रूप ले लिया है। जगह-जगह सरकार के खिलाफ नारे लग रहे हैं। गाइडलाइन में संशोधन की मांग की जा रही है।
छठ पूजा की गाइडलाइन के खिलाफ संयुक्त युवा संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंका
संयुक्त युवा संघ ने सोमवार को साकची गोलचक्कर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया। संघ के सदस्यों का कहना था कि आस्था के महापर्व पर झारखंड सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार नदी-तालाब में छठ पूजा नहीं करने का आदेश देना, उपासना में विघ्न पैदा करने वाला है। तुगलकी फरमान जारी कर धर्म में अड़चन लगाने का प्रयास किया जा रहा है। चुनाव में सरकार की ओर से पूरी छूट थी। उस समय संक्रमण फैलने का खतरा सरकार को नहीं दिख रहा था। सत्ता सुख के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को भूल कर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए रैलियां की जा रही थीं। तब झारखंड सरकार मूकदर्शक क्यों बनी थी। पुतला दहन कार्यक्रम में केंद्रीय अध्यक्ष रवि सिंह चंदेल, नगर अध्यक्ष धीरज चौधरी, महासचिव राजेश सिंह, संगठन मंत्री मोहन दास, सचिव विक्की तारवे, उपाध्यक्ष देवेश शुक्ला, उपाध्यक्ष शुभम कुमार, सह सचिव सिद्धार्थ सिंह, प्रकाश सिंह, मनीष सिंह शामिल थे।
छठ के लिए सरकार के आदेश को कांग्रेस समेत विभिन्न दलों ने की बदलाने की मांग
महापर्व के निर्णय पर फिर से विचार करे सरकार:भरत
भाजपा नेता भरत सिंह ने छठ पूजा को लेकर श्रद्धालुओं के घाट जाने पर रोक लगाने संबंधी आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है। कहा - छठ महापर्व हिंदुओं की आस्था का महापर्व है, जिसे बड़े उल्लास-श्रद्धा के साथ मनाते हैं। यह पर्व नदी घाट जाए बगैर पूर्ण करना मुश्किल है। इसलिए राज्य सरकार के फैसले का विरोध कर नई गाइडलाइन के साथ घाटों की सफाई की मांग की है।

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