जोनल प्लान के ड्राफ्ट में गड़बड़ी, मेन रोड, अशोक नगर का प्लॉट नंबर गायब, नहीं पास होगा नक्शा
रांची में 2037 की आबादी काे ध्यान में रखते हुए शहर के विकास के लिए तैयार किए गए जाेनल प्लान के ड्राॅफ्ट में कई गड़बड़ी है। सात जाेन में बंटे इस प्लान के प्रत्येक जाेन में लैंड यूज से लेकर उसके उपयाेग तक काे बदल दिया गया है। अशाेक नगर हाउसिंग साेसाइटी, अरगाेड़ा काॅलाेनी, हरमू हाउसिंग काॅलाेनी, एजी काॅपरेटिव, डाेरंडा, अरगाेड़ा से कटहल माेड़, कडरू, एमजी राेड, चर्च राेड में जमीन का प्लाॅट नंबर गायब कर दिया गया है।
किस जाेन में कहां कितनी जमीन खाली है, जहां इंडस्ट्रीज, काॅमर्शियल एक्टिविटी विकसित हाेगी और कहां ऑटाे स्टैंड बनेगा, इसका सर्वे किए बिना प्लानिंग की गई है। मास्टर प्लान के प्रस्तावाें काे उलट-पुलट कर जाेनल प्लान तैयार कर दिया गया है। रिंग राेड के अंदर का क्षेत्र मिक्सड, कंपोजिट यूनिट में डाला गया है, जबकि रिंग राेड के दूसरी तरफ के पूरे क्षेत्र काे एग्रीकल्चर लैंड कर दिया गया है। सिकिदिरी राेड, बूटी, अनगड़ा, धुर्वा, नामकुम, कांके में रिंग राेड के बाहर जिन्होंने जमीन ले ली है वे अपनी जमीन पर किसी तरह का नक्शा पास नहीं करा सकते।
यह बातें शनिवार काे दैनिक भास्कर कार्यालय में आयाेजित टाॅक शाे में आर्किटेक्ट ने कही। उन्होंने कहा कि गड़बड़ियों काे टेक्निकल सेशन बुलाकर दूर नहीं किया गया ताे वर्तमान शहर के साथ भविष्य में रिंग राेड के आसपास जमीन लेनेवाले लाखाें लाेग प्रभावित हाेंगे।
समस्या: आर्किटेक्ट से समझिए प्लान की खामियां
- मास्टर प्लान और झारखंड बिल्डिंग बायलॉज पहले से बना है। इससे बाहर जाकर जाेनल प्लान तैयार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद मास्टर प्लान के कई सुझावों काे जाेनल प्लान में बदला गया है। बायलॉज और मास्टर प्लान से अलग जाे भी प्रावधान किए गए उसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे लाेगाें काे पता नहीं चलेगा कि जाेनल प्लान के लागू हाेने से वे कैसे प्रभावित हाेंगे।
- मास्टर प्लान में 25 कैटेगरी का लैंड यूज तय किया गया है। जबकि बिल्डिंग बायलॉज में 9 कैटेगरी का लैंड यूज है। इसमें 114 तरह की एक्टिविटी के उपयाेग के लिए नक्शा पास करने का प्रावधान है। जबकि जाेनल प्लान में 42 कैटेगरी का लैंड यूज तय कर दिया गया। जमीन की उपयोगिता भी बदल दी गई।
- मास्टर प्लान में 652 वर्ग किमी के क्षेत्र काे शामिल करते हुए लैंड यूज 25 कैटेगरी में बांटा गया है। जबकि जाेनल प्लान में लैंड यूज काे बदल दिया गया। इस वजह से सभी लैंड यूज का प्रतिशत बदल गया। किस आधार पर इसे बदला गया और क्याें यह कहीं स्पष्ट नहीं है।
- बिल्डिंग बायलॉज में भवन की उपयोगिता के हिसाब से (ऊंचाई) फ्लाेर एरिया रेशियो (एफएआर) तय किया गया है। जाेनल प्लान में एफएआर की परिभाषा बदलकर डेंसिटी आधारित कर दी गई। रांची में यह संभव नहीं है।
- पुराने मास्टर प्लान से जाे भी क्षेत्र बाहर था उसे नए मास्टर प्लान में मौजूदा गांव में चिन्हित करके दिखाया गया है। कटहल माेड़, नामकुम, बूटी बस्ती, कांके के अधिकतर क्षेत्राें काे इसमें शामिल किया गया। अब जाेनल प्लान में मौजूदा गांव का अलग लैंड यूज बताया गया है।
- अशाेक नगर, हरमू-अरगाेड़ा हाउसिंग काॅलाेनी, एजी काॅलाेनी, न्यू एजी काॅलाेनी सहित अन्य हाउसिंग सोसाइटी में प्लाॅट काे नंबर से जाना जाता है। जबकि जाेनल प्लान में एक भी प्लाॅट का नंबर नहीं है। हरमू, अशाेक नगर, अरगाेड़ा के क्षेत्र काे कडरू और संत कुलदीप के नाम से दिखाया गया है।
खूबियां: 125 पार्क व रिंग रोड के बाहर दो इंटर स्टेट बस टर्मिनल बनाने का प्रस्ताव
- 7 जोन में आबादी के अनुसार 125 नए पार्क प्रस्तावित हैं। पार्क, खेल मैदान बनने से हरियाली के साथ मनोरंजन के साधन बढ़ेंगे।
- जोन बी में रातू, कांके से ओरमांझी के क्षेत्र को एजुकेशन हब के रूप में प्रस्तावित किया गया है। इसके लिए जमीन उपलब्ध है।
- रिंग रोड के बाहर दो इंटर स्टेट बस टर्मिनल व ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का प्रस्ताव है। इससे शहर में बड़े वाहनों का ट्रैफिक लोड कम होगा।
- जोन डी में लालगंज, गेतलातू, मेसरा क्षेत्र को हायर एजुकेशन के रूप में चिन्हित किया गया है। इससे नए विकसित हो सकेंगे।
समाधान: ड्राफ्ट की गड़बड़ी ऐसे हाेगी दूर
बिल्डिंग बायलॉज के आधार ही जाेनल प्लान बने, उसमें बदलाव न हो
मास्टर प्लान, बिल्डिंग बायलॉज से अलग क्या किया जा रहा है जाेनल प्लान में इसकी लिस्ट सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि लोगों काे पता चले कि जाेनल प्लान से उन पर क्या असर पड़ेगा। मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर जाेनल प्लान बनना चाहिए। उसमें बदलाव नहीं हो।
अरुण कुमार, आर्किटेक्ट
लैंड यूज में बदलाव को सार्वजनिक करें
लैंड यूज व राेड की चौड़ाई वर्तमान और भविष्य में भी लाेगाें काे प्रभावित करेगी। इसलिए दाेनाें में स्पष्टता हाेनी चाहिए। लैंड यूज कहां का बदला जा रहा है उसे सार्वजनिक करें। इससे प्रभावित लाेग आपत्ति दर्ज कराने आगे आएंगे।
सुजीत भगत, आर्किटेक्ट
टेक्निकल सेशन बुलाकर खामियां दूर हों
ट्रांजिट ओरिएंट डेवलपमेंट का कांसेप्ट लाइट मेट्रो प्रोजेक्ट के साथ समाप्त हाे गया। फिर भी जाेनल प्लान उसी आरधार पर बना है। प्रत्येक जाेन के लिए दाे-दाे दिन का टेक्निकल सेशन बुलाकर अशुद्धियां काे दूर करने के बाद ही फाइनल ड्राॅफ्ट बने।
अनिल सिंह, आर्किटेक्ट
भास्कर अपील
- जोनल प्लान के ड्राफ्ट अंग्रेजी में जारी किया गया है। इसे हिन्दी में भी जारी करे निगम, ताकि आम आदमी को यह आसानी से समझ में आ सके
- आम लोग ranchimunicipal.com वेबसाइट पर ड्राफ्ट को देखकर ज्यादा से ज्यादा आपत्ति व सुझाव दें ताकि गड़बड़ियां दूर हो सकें
- आप अपनी आपत्ति 31 दिसंबर तक नगर आयुक्त के नाम पर निगम कार्यालय में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जमा करें

Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें