जोड़ा शहर में घुसे 11 हाथी, कई जगहों पर की तोड़फोड़; बुजुर्ग पर हमला, मौत
जोड़ा नगरपालिका क्षेत्र में गुरुवार तड़के 11 हाथियों का एक दल घुस आया। हाथियों ने एक बुजुर्ग की जान ले ली। मृतक की पहचान जोड़ा नगरपालिका के बच्चू हाटिंग क्षेत्र के मार्कंड नाइक के रूप में की गई। जानकारी के अनुसार, 11 हाथी गुरुवार तड़के करीब 3 बजे बिलाईपाड़ा बीट, मनमोरा वन मार्ग से नदी पारकर जोड़ा में घुसे। सेंट्रल हॉस्पिटल के पास हाथी अलग-अलग बंट गए। तारिणी चौक के पास एमएमटीसी कॉलोनी में चार हाथियों ने दीवार और गेट को तोड़ दिया।
अन्य सात हाथियों ने एक झोपड़ी को तोड़ दिया। पास से गुजर रहे बच्चू हटिंग के मार्कंड नाइक ने हाथियों को भगाने की कोशिश की तो एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें केंद्रीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। सुबह करीब 5 बजे तक हाथियों ने शहर में तबाही मचाने के बाद मनमोरा जंगल की ओर रूख किया। घटना के बाद जोड़ा शहरवासी दहशत में हैं।
गोइलकेरा : दो गांवों में पांच घरों को तोड़ा
20-25 हाथियों के एक झुंड ने गोइलकेरा से सटे दोड़बो और टुनडिका गांवों में बुधवार रात उत्पात मचाया। हाथियों ने इस दौरान पांच लोगों के घर तोड़ डाले वहीं खेतों में लगी धान व मक्के की फसलों को भी नष्ट कर दिया। हाथियों के अचानक धमकने से दोनों गांव के लोग एकजुट हुए। उन्होंने हाथियों को खदेड़ा तो सभी दोड़बो गांव पहुंच गए। वहां रेलकर्मी लंबोदर सिजुई के घर को तोड़ डाला।
परिवार के 6 लोगों ने भागकर जान बचाई। एक बुजुर्ग महिला हाथियों को देखकर कोने में दुबकी रही। गनीमत रही कि हाथियों ने उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया। करीब ढाई घंटे तक हाथी गांव में उत्पात मचाते रहे।
जगन्नाथपुर : कई किसानों की फसल को रौंदा
जगन्नाथपुर प्रखंड के ग्राम कुंदरीझोर टोला जोड़ापोखर में बुधवार देर रात 15-16 जंगली हाथियों के झुंड ने कई किसानों की धान की खेती को नष्ट कर दिया। स्थानीय लोगों कहना है कि देर रात हाथियों के झुंड ने खेतों में खड़ी फसल को खाकर तहस-नहस कर दिया।
वहीं काट कर रखी हुई धान को हाथियों द्वारा पैरो से कुचलते हुए पुरी तरह बिखरा दिया गया। जितना धान खाने से नुकसान नहीं हुआ है उतना कटी हुई धान को कुचल कर बिखरा देने से हुआ है। हाथियों द्वारा फसल नष्ट किए जाने के बाद से किसान बेहद आक्रोशित हैं। किसानों के अनुसार भोजन की तलाश में जंगली हाथी अक्सर पहाड़ों से निकलकर धान के खेतों में पहुंच जाते हैं।

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