बोकारो से नहीं चलीं बसें, ट्रेन रोकने की कोशिश नाकाम चास में सड़क जाम करते 20 बंद समर्थक गिरफ्तार-रिहा - AKB NEWS

बोकारो से नहीं चलीं बसें, ट्रेन रोकने की कोशिश नाकाम चास में सड़क जाम करते 20 बंद समर्थक गिरफ्तार-रिहा

नए कृषि कानून काे वापस लेने के लिए आंदाेलनरत किसानों के समथर्न में भारत बंद का बाेकाराे जिले में मिलाजुला असर रहा। जिले से गुजरने वाले हाइवे पर ज्यादातर यात्री बसें और भारी माल वाहक वाहन नहीं चले। वहीं बाेकाराे से चलने वाली लंबी दूरी की एक भी यात्री बस शाम 4 बजे तक नहीं खुली। शहर में सिटी सेंटर, राम मंदिर, नयामोड़ और चास की अधिकतर दुकानें बंद रहीं। हालांकि बैंक, डाकघर और अन्य सरकारी कार्यालय खुले रहे।

बंद का असर शहरी क्षेत्राें की अपेक्षा ग्रामीण इलाकाें में ज्यादा देखने काे मिला। चास मंे पुलिस ने सड़क पर उतरे 20 बंद समर्थकों को दाेपहर में गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें शाम को रिहा कर दिया गया। भारत बंद को सफल बनाने को लेकर सुबह 9 बजे से ही समर्थक सड़क पर उतर गए थे।

नयामोड़ बिरसा चौक को झामुमो, कांग्रेस, राजद और वामदलों के कार्यकर्ताओं ने जाम कर दिया था। इस कारण चौक पर जाम लग गया था। वहां काफी देर तक लोग फंसे रहे। बीएस सिटी पुलिस नयामोड़ पहुंचकर कार्यकर्ताओं से बात कर उन्हें सड़क से हटाने में लगी रही। उधर, एनएच-23 पर एसयूसीआई के कार्यकर्ता जुलूस निकाल कर नारेबाजी करते हुए नयामोड़ पहुंचे।

सिवनडीह के पास एनएच-23 को कांग्रेस और झामुमो कार्यकर्ताओं की ओर से जाम कर दिया गया। यहां सुरक्षा कमिर्याें और बंद समर्थकाें के बीच बहस हो गई। पुलिस के समझाने पर करीब एक घंटे रहने के बाद बंद समर्थक सड़क से हटे।

स्टेशन पर पहुंच बंद समर्थकों ने किया प्रदर्शन, सुरक्षाकर्मियों ने हटाया

बोकारो रेलवे स्टेशन पर 11 बजे के करीब बंद समर्थक पहुंचे और 11.20 बजे पहुंची पटना-रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस के इंजन के आगे रेल पटरी पर उतर गए। ट्रेन के आगे कांग्रेस, झामुमो और राजद के नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी करते रहे। इसके बाद रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी और स्टेशन प्रबंधक ने सभी को रेल पटरी से हटाया।

ट्रेन निर्धारित समय 11.30 बजे से करीब 10 मिनट पहले ही पहुंच गई थी। हालांकि सुरक्षा कमिर्याें की तत्परता व सूझबूझ से ट्रेन समय से रवाना हो गई। वहीं बोकारो बस पड़ाव से सुबह में एक भी बस नहीं खुली। बस पड़ाव में लंबी दूरी की बसें शाम को रवाना हुई। जबकि दिन भर रांची, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, देवघर, टाटा, पुरूलिया, चाईबासा के लिए खुलने वाले बसें खड़ी रही।

कुछ बसें धनबाद बस पड़ाव से रांची के लिए खुली, लेकिन वह बोकारो में आकर फंस गई। इसी तरह बोकारो से जाने के बाद कई बसें पेटरवार और गोला भी फंसी रही। बंदी का व्यापक असर बस पड़ाव पर ही देखा गया। न तो कोई यात्री ही नजर आए और ही बसों के एजेंट। बस पड़ाव में बनी होटले भी बंद रही। बंद में हर बसों की सफाई करते हुए चालक और खलासी नजर आए।

ट्रेन यात्रियाें से ऑटाे और ट्रेकर चालकों ने वसूला अधिक किराया

बोकारो रेलवे स्टेशन पर सुबह में उतरने वाले यात्रियाें से ऑटो और ट्रेकर चालकों ने बंदी के नाम पर मनमाना किराया वसूला। इसे लेकर कई यात्रियों की बहस भी ऑटो वालों से हो गई। जनशताब्दी से आए सेक्टर-9 के रहने वाले रंजन कुमार ने बताया कि ऑटाे वाले को अधिक किराया देकर सुबह में पहुंचना पड़ा।

सिवनडीह में जाम के कारण फंसी रही एंबुलेंस

सिवनडीह के कर्बला मैदान मोड़ पर सड़क जाम कर रहे बंद समर्थकों ने कुछ देर के लिए वहां एक एंबुलेंस फंसी रही। वहां बंद समर्थक सड़क के बीच में बैठ कर जाम किए हुए थे। इस कारण छाेटे-बड़े वाहन फंसने से वहां जाम लग गया था। कुछ देर बाद पुलिस वालों ने बंद समर्थकों को सड़क से हटा कर एंबुलेंस के लिए रास्ता खाेला।

बंद को देखते हुए शहर के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस जवानों और अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। बंद समर्थकों से निपटने को लेकर पुलिस की ओर से लगातार गश्ती भी की जा रही थी। इस कारण कहीं भी बंद समर्थक एक जगह कई घंटों के लिए जम नहीं पा रहे थे।

एनएच-23 पर लग गई थी वाहनों की कतार

बंद के दौरान एनएच-23 के कर्बला मैदान के पास फोर लेन मोड़ को समर्थकों ने जाम कर दिया था। उसके बाद सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। कई कार और बाइक वाले रूट बदलकर निकल रहे थे। इस बीच सड़क पर चलने वाले फंस भी गए थे।

जाम करीब आधे किलोमीटर दूर तक लग गई थी। बंद समर्थक सिर्फ बाइक वालों को किनारे से गुजरने दे रहे थे, जिसके कारण कार सवार लोग काफी परेशान हो गए थे। सिवनडीह के बाद कुछ बंद समर्थक एनएच-23 को बालीडीह के 43 मोड़ के पास जाम करने का प्रयास किया, लेकिन बालीडीह पुलिस ने समर्थकों को सड़क से हटा दिया। सुबह में उकरीद मोड़ पर वाम मोर्चा के कार्यकर्ताओं की रैली की वजह से भी सड़क जाम हो गई थी।




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