फैसला: उलीडीह श्मशान घाट की जमीन पर नहीं दफनाया जाएगा शव
उलीडीह शंकोसाई के गुटरूगोड़ा श्मशान में अंतिम संस्कार नहीं होगा। गुटरूगोड़ा अखाड़ा परिसर में ग्रामीणों व प्रशासन के बीच चली दो घंटे की बैठक के बाद फैसला सुनाया। इसमें प्रशासन की ओर से एडीसी प्रदीप प्रसाद, डीसीएलआर रवींद्र गगराई व मानगो की सीओ कामिनी कौशल थीं, जबकि काफी संख्या में ग्रामीण भी थे।
उलीडीह में खाता 908, प्लाट 2115 व 2116 में करीब डेढ़ एकड़ अनाबाद बिहार (झारखंड) सरकार की गैरमजरूआ भूमि है। इसपर स्थानीय लोग श्मशान का दावा कर दो दिन पहले शव दफनाने पहुंचे थे, जिसे प्रशासन ने रोक दिया था। इसके बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई थी। विवाद सुलझाने के लिए बैठक की गई थी।
कोर्ट जाने की सलाह को लेकर गांव वाले भी तैयार
एडीसी ने कहा - गांव वालों के पास किसी तरह का कागजात है तो व्यवहार न्यायालय में अपील कर वहां से आदेश लाएं। कोर्ट का फैसला व सरकार की ओर से आदेश जारी होता है तो जमीन पर गांव वालों का दावा कायम होगा। इस पर गांव वालों ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी सहमति प्रदान कर कहा-कोर्ट में इस संबंध में अपील की जाएगी।
जिस जमीन पर गांव वाले श्मशान भूमि का दावा कर रहे हैं उक्त जमीन गैरमजरूआ भूमि है। गांव वालों ने बैठक में प्रशासन को भरोसा दिया है कि इस जमीन का उपयोग श्मशान के तौर पर नहीं करेंगे। सरकारी जमीन का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा।-प्रदीप प्रसाद, एडीसी।

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