सरकारी-गैर सरकारी संस्थाओं में ‘हो’ का ट्रेनिंग प्रोग्राम जरूरी - AKB NEWS

सरकारी-गैर सरकारी संस्थाओं में ‘हो’ का ट्रेनिंग प्रोग्राम जरूरी

हो-हिंदी शब्दकोश हो कजि पुडुवा का विमोचन कोल्हान आयुक्त मनीष रंजन व कोल्हान विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. गंगाधर पांडा ने किया। कोल्हान प्रमंडलीय कार्यालय सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य वक्ता आयुक्त मनीष रंजन ने कहा- हो हिंदी शब्दकोश विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
इससे हो भाषा के बच्चों को कॅरियर से जोड़ने का कार्य किया जा सकेगा। सरकारी विभागों एवं अन्य गैर सरकारी संस्थाओं में हो भाषा की जानकारी के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम जरूरी है।

केयू के कुलपति गंगाधर पांडा ने कहा-केयू और इसके अंतर्गत अंगीभूत महाविद्यालय में हो भाषा अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। डीआईजी राजीव रंजन सिंह ने कहा- ग्रामीण क्षेत्र एवं जंगल क्षेत्र में ग्रामीण हिंदी नही जानते हैं। इस कारण सरकारी कर्मियों को परेशानी होती है। उपायुक्त अरवा राजकमल ने कहा हो हिंदी शब्दकोश सरकारी कार्य करने वाले कर्मियों के लिए ग्रामीण क्षेत्र भ्रमण में सहायक सिद्ध होगा। लेखक कोल्हान का इतिहास लिखे, प्रशासन सहयोग करेगा।

एसपी अजय लिंडा ने कहा-इस पुस्तक से युवाओं एवं नए लेखकों को नए रचनात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। कोल्हान के अनेक महापुरुष योद्धा क्रांतिकारी एवं वैभवशाली इतिहास के लिए लेखकों को प्रोत्साहन मिलेगा। भाषा साहित्य के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों को दूर किया जा सकेगा।

ये भी थे माैजूद : सरायकेला के डीडीसी प्रवीण गागराई, रविंदर गागराई, शंकराचार्य सामड, साधु चरण समड, श्रीमती निवेदिता, जयंती देवगम, डॉ प्रिंस पिंगुवा, प्रो. बसंत चाकी, संजीव बिरुली, सुनयना बोयपाई, सिंगा तियू, हरि सिंह लागुरी, तिलक बारी, दामोदर बारी, अर्जुन बिरुवा, प्रो संजय कुमार बिरुली, प्रो. कस्तूरी बोयपाई आदि।

डिक्शनरी को एप के रूप में भी जारी किया जाएगा

शब्दकोश के लेखक अर्जुन मुंदुईया ने कहा भारतीय रेलवे में रहते हुए मुझे लगा कि रिटायरमेंट के बाद कुछ करना चाहिए। हो-हिंदी शब्दकोश अपनी मातृभाषा को बचपन में सीखने से वंचित रह गए लोग एवं गैर हो भाषा भाषियों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर पुस्तक का लेखन किया गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी में लगे छात्रों के लिए यह पुस्तक काफी मददगार साबित होगी।




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