आत्महत्या:10वीं के छात्र ने की खुदकुशी, लिखा-मैं एक्टर बनना चाहता था; सब इंजीनियर बनाने पर तुले थे- मैं जा रहा हूं : रांची - AKB NEWS

आत्महत्या:10वीं के छात्र ने की खुदकुशी, लिखा-मैं एक्टर बनना चाहता था; सब इंजीनियर बनाने पर तुले थे- मैं जा रहा हूं : रांची

     
दो पन्नों वाले सुसाइड नोट के वे अंश जिसमें बच्चे का तनाव दिखता है
    आप किसी ने भी मुझे और मेरे सपनाें काे समझने की काेशिश नहीं की।

    मुझे केवल दर्द, तनाव और आंसू मिले। मैं कभी इंजीनियर नहीं बनना चाहता था, पर यही करने         को कहा। आखिर क्याें।
  • मैदान नहीं छाेड़ रहा, आप लाेगाें ने इसके लिए मुझे बाध्य किया, मेरी हत्या की।
  • राजधानी के एक स्कूल के 10वीं के 16 साल के छात्र ने रविवार काे अरगाेड़ा स्थित घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस काे उसके कमरे से सुसाइड नाेट मिला है। इसमें लिखा है-मैं एक्टर बनना चाहता था, लेकिन सब इंजीनियर बनाने पर तुले थे...इसलिए मैं जा रहा हूं। पुलिस ने सुसाइड नाेट जब्त कर लिया है। छात्र के परिजनाें ने पुलिस काे बताया कि उसकी साेमवार काे परीक्षा थी। रविवार सुबह पिता ने उससे कहा था कि पढ़ाई पर ध्यान दाे। लेकिन सही ढंग से तैयारी न हाेने के कारण वह तनाव में था।

    सुबह नाश्ते के बाद वह अपने कमरे में चला गया। घरवालाें काे लगा कि पढ़ाई करने गया है। दाेपहर 12 बजे मां उसे खाना खाने के लिए बुलाने गई ताे दरवाजा बंद था। खटखटाने पर काेई जवाब नहीं मिला ताे मां ने शाेर मचाया। दरवाजे की कुंडी ताेड़ी गई ताे अंदर छात्र फांसी पर लटका हुआ था। पिता ने उसे फंदे से उतारा और अस्पताल ले गए, जहां डाॅक्टराें ने उसे मृत घाेषित कर दिया। दाेपहर 1:30 बजे पिता ने अरगाेड़ा पुलिस काे इसकी सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने शव काे पाेस्टमार्टम के लिए भेजा।

    शिक्षक बाेले-पढ़ाई में अच्छा और मिलनसार था

    स्कूल के शिक्षक ने कहा-स्कूल के जूनियर सेक्शन के स्टूडेंट्स काे ड्रामा और एक्टिंग में ज्यादा पार्टिसिपेट नहीं कराया जाता है। सीनियर सेक्शन यानी 11वीं और 12वीं के बच्चे ही ज्यादा पार्टिसिपेट करते हैं। हाे सकता है कि वह बाहर एक्टिंग में अच्छा हाे। वैसे पढ़ाई में वह अच्छा स्टूडेंट था। स्वभाव से भी काफी मिलनसार था।

    2 मिनट बात करने और सुनने से जिंदगी बचाई जा सकती है

    सीआईपी के बाल एवं किशोर अवस्था मनोचिकित्सक डॉ. निशांत गोयल ने कहा कि दाे मिनट बात करके किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है, इसलिए पैरेंट्स बच्चों से बात करें और बच्चे पैरेंट्स के सामने अपनी बात रखें।

    पैरेट्स क्या करें...

    • पैरेंट्स और बच्चों के बीच बातचीत कम होती है। खासकर पढ़ाई जैसे मुद्दे पर खुलकर बात करें। समस्याओं को जानें।
    • बच्चों पर अपनी इच्छा न थोपें, उनकी इच्छा भी पूछें और बातचीत कर लक्ष्य तय करें।
    • बच्चों के व्यवहार में बदलाव दिखता है तो हर हाल में कारण का पता जरूर लगाएं।
    • अगर बच्चे खुलकर बातचीत नहीं कर रहे हैं तो उसके दोस्तों, भाई-बहन से पता कराएं।
    • तनाव दूर करने के लिए टीचर्स या प्रोफेशनल काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है।

    बच्चों के लिए...

    • बच्चों को लगता है कि उन पर पढ़ाई को लेकर प्रेशर है तो टीचर या पैरेंट्स से खुलकर बातचीत करें।
    • अपने रूटीन में पढ़ाई के अलावा खेलकूद और अपने हॉबी के लिए भी समय जरूर निकालें।

    देश में हर 11 मिनट में एक स्टूडेंट कर रहे खुदकुशी

    • नेशनल क्राइम रिकाॅर्ड ब्यूराे के मुताबिक देश में हर 11 मिनट में एक स्टूडेंट खुदकुशी कर रहा है।
    • पिछले 5 साल में स्टूडेंट की आत्महत्या में 52% की वृद्धि।
    • आत्महत्या करने वाले सबसे ज्यादा 53% स्टूडेंट सिक्किम के।
    • छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भी यह आंकड़ा 25% से ऊपर है।
    • सबसे ज्यादा आत्महत्या करने वालाें में 15 साल से 29 साल तक के युवा शामिल है।
    • इन युवाओं में 46 से 56 फीसदी तक स्टूडेंट हाेते हैं।
                        

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