जेबीवीएनएल से नया लेटर ऑफ क्रेडिट लेने के बाद ही डीवीसी देगा बिजली, उपभोक्ताओं से सीधे बिजली लेने की अपील
दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने बकाया मामले में अपना पक्ष रखा है। साथ ही, जेबीवीएनएल के लेटर ऑफ क्रेडिट के तहत पेमेंट गारंटी के रूप में जमा 160 से 180 करोड़ रुपए इनवोक (भुनाने) के लिए बैंक को पत्र लिखा है। डीवीसी ने जेबीवीएनएल से कहा है कि अब यदि पेमेंट नहीं मिला तो ग्रिड से बिजली नहीं लेने दिया जाएगा। क्रेडिट पर बिजली लेने के लिए नया लेटर ऑफ क्रेडिट जारी करें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो जेबीवीएनएल एडवांस पेमेंट करके बिजली ले सकता है। दूसरी ओर, डीवीसी ने उपभोक्ताओं से सीधे बिजली लेने के लिए अपील की है। यह जानकारी डीवीसी के पीआरओ अभय अभ्यंकर ने जानकारी दी।
जेबीवीएनएल पुराने बकाए का एक किस्त देकर चुप बैठा
डीवीसी ने कहा है कि लेटर ऑफ क्रेडिट के आधार पर बिजली आपूर्ति करनी है। जेबीवीएनएल द्वारा एक लेटर ऑफ क्रेडिट दिया गया था, जिसे इनवोक किया गया है। भविष्य में बिजली की आपूर्ति के लिए जेबीवीएनएल को नया लेटर ऑफ क्रेडिट देना होगा, नहीं तो अगले दिन की बिजली के लिए एडवांस दे सकता है। डीवीसी दैनिक आधार पर जमा की गई राशि के अनुसार बिजली देता रहेगा।
डीवीसी के सीई (कॉमर्शियल) माणिक रक्षित ने जेबीवीएनएल को बिजली आपूर्ति और बकाए की सच्चाई बताने के लिए आधिकारिक पत्र जारी किया है। कहा है कि जेबीवीएनएल से 660 मेगावाट बिजली आपूर्ति का करार था। 1 अप्रैल 2020 तक जेबीवीएनएल पर 5209 करोड़ बकाया था। करार के तहत जेबीवीएनएल को मार्च से नियमित भुगतान करना था। साथ ही, पुराने बकाए के लिए झारखंड सरकार से अनुमोदन लेने की सहमति हुई थी, लेकिन जेबीवीएनएल ने अपने पुराने बकाए के विरुद्ध केवल एक किस्त देकर चुप बैठ गया।
कोयला व कर्मचारियों के वेतन देने में भी दिक्कत
डीवीसी ने कहा कि उसे कोयले के लिए अग्रिम भुगतान करना पड़ता है। अपने कर्मचारियों को वेतन देना पड़ता है। जेबीवीएनएल द्वारा नियमित भुगतान नहीं किए जाने के कारण उसे इसमें दिक्कतें आ रही हैं। अगर, जेबीवीएनएल भुगतान नहीं करेगा तो डीवीसी के बिजली उत्पादन में बाधा आएगी। इसलिए, डीवीसी बिजली की आपूर्ति नहीं कर सकता है।

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