कोरोना वैक्सीन:काेराेना से लड़ने में हम सबसे आगे रहे ताे टीकाकरण में पीछे क्याें, पड़ोसी बिहार, यूपी, ओडिशा तक हमसे कहीं आगे: रांची - AKB NEWS

कोरोना वैक्सीन:काेराेना से लड़ने में हम सबसे आगे रहे ताे टीकाकरण में पीछे क्याें, पड़ोसी बिहार, यूपी, ओडिशा तक हमसे कहीं आगे: रांची


 

  • टीके से फेफड़ा कमजाेर हाेगा, लकवा मार देगा, नसें कमजाेर हाे जाएंगी, ये सभी भ्रांतियां हैं
  • हकीकत- प्रदेश के डेढ़ लाख लाेग वैक्सीन ले चुके हैं, एक में भी साइड इफेक्ट नहीं
  • काेराेना से लड़ने में झारखंड सबसे आगे रहा। लेकिन वैक्सीनेशन में लगातार पिछड़ रहा है। अब तक राज्य में 1,57,706 लोगों काे ही टीके लगाए जा सके हैं, जबकि लक्ष्य 3,49,819 का था। यानी महज 45%। इसका सबसे बड़ा कारण लाेगाें के मन में छिपा वहम है। कुछ लाेग कहते हैं कि टीका लगवाने से माैत का खतरा है ताे कुछ लोगों का मानना है कि इससे फेफड़ा कमजाेर हाे जाएगा, लकवा मार देगा या नसें कमजाेर हाे जाएंगी।

    लेकिन ये सब भ्रांतियां हैं। हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। अब तक जितने लाेगाें काे टीके लगे हैं, उनमें से एक भी व्यक्ति काे साइड इफेक्ट नहीं हुआ है। इसलिए टीके लगवाइए। यह कोरोना से जीत का टीका है, इसका तिरस्कार न करें।

    टीका लगवाने में हम 16वें स्थान पर, बिहार दूसरे पर

    टीकाकरण में झारखंड16वें स्थान पर है। पड़ाेसी राज्य बिहार 79.8% के साथ दूसरे नंबर पर है। ओड़िशा भी 78.8% के साथ चाैथे ताे यूपी 72.9% के साथ सातवें नंबर पर है। यह आंकड़ा 7 फरवरी तक का है। लेकिन झारखंड में 10 फरवरी काे भी यह आंकड़ा 45% पर ही पहुंचा है।

    रांची की हालत और भी दयनीय

    टीकाकरण के मामले में रांची की हालत दयनीय है। यहां सिर्फ 29% को ही टीके लगे हैं, जो राज्य में सबसे कम है।

    इनसे जानिए...टीका लगवाने से नहीं हाेता काेई नुकसान

    मैं 67 साल का, काेराेना के कारण 37 दिन अस्पताल में रहा, फिर भी लिया टीका-डाॅ. जेके मित्रा

    रिम्स के मेडिसिन डिपार्टमेंट के एचओडी डाॅ. जेके मित्रा ने कहा-मैं 67 साल का हूं। बीपी का मरीज हूं। काेराेना हाेने के कारण 37 दिन तक अस्पताल में रहा। फिर भी मैंने टीका लगवाया और पूरी तरह से स्वस्थ हूं। अब काेराेना का बूस्टर डाेज लेने के लिए भी तैयार हूं। यह वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। भ्रम न पालें, टीका जरूर लगवाएं।

    मुझे दाे बार काेराेना हुआ, 33 दिन अस्पताल में रहा, पर टीका लगवाया-डाॅ. सीबी सहाय

    रिम्स के न्यूराे सर्जरी विभाग के प्राेफेसर डाॅ. सीबी सहाय ने कहा-मैं 63 साल का हूं। दाे बार काेराेना हुआ। 33 दिन अस्पताल में रहा। इसके बावजूद मैंने टीका लगवाया। आज मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं। टीका पूरी तरह सुरक्षित है।

    जानिए कैसे सुरक्षित है टीका

    इसे ताे काफी कम समय में बनाया गया है, क्या यह वैक्सीन हमारे लिए सुुरक्षित हाेगी?

    -वैक्सीन बनने के बाद इसका क्लिनिकल ट्रायल किया गया। कई चरणों में इसकी जांच हुई। हर मापदंड पर खरा उतरने के बाद ही इसे लगाने की मंजूरी दी गई है। इसलिए यह वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है।

    जाे काेराेना से ठीक हाे गए, क्या उन्हें भी जरूरी है?

    - हां, जो पहले संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें भी वैक्सीन की पूरी खुराक जरूरी है। क्योंकि यह एक मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने में मदद करेगा।

    बुखार और अन्य बीमारी हैं तो टीका ले सकते हैं?

    -बुखार के मरीज वैक्सीन नहीं लें। बुखार कम होने का इंतजार करें और उसके बाद ही वैक्सीन लगवाएं। टीका लेने से पहले अपनी बीमारियों के बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं।

    यदि कोई कैंसर, डायबिटीज और हाइपरटेंशन की दवा ले रहा है तो उसे वैक्सीन लेनी चाहिए?

    -स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले ही बताया है कि कैंसर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन की स्थिति में एक या अधिक बीमारी से पीड़ित लोगों को हाई रिस्क की श्रेणी में रखा गया है। इनके लिए कोरोना की वैक्सीन लेना बेहद जरूरी है।
    -जैसा कि कोविड टास्क फोर्स के संयोजक डॉ. प्रभात कुमार ने बताया


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