मौनी अमावस्या:आज सवा घंटे भी मौन रखा तो मन-वाणी को मिलेगी नई ऊर्जा, व्रत रख मौन रहने पर मुनि समान पद व सम्मान मिलेगा: रांची - AKB NEWS

मौनी अमावस्या:आज सवा घंटे भी मौन रखा तो मन-वाणी को मिलेगी नई ऊर्जा, व्रत रख मौन रहने पर मुनि समान पद व सम्मान मिलेगा: रांची


 माघ कृष्ण अमावस्या 11 फरवरी को ध्वज योग में मनेगी। इसे मौनी अमावस्या भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान और पितरों को तर्पण करने से भी अधिक महत्व मौन धारण कर पूजा-उपासना करने का है, जिसका कई गुना पुण्य फल मिलता है। खास कर मौन साधना जहां मन को नियंत्रित करने के लिए होती है, वहीं इसे करने से वाक् शक्ति भी बढ़ती है। पंडितों का कहना है कि जिन लोगों के लिए पूरा दिन मौन धारण करना मुश्किल है वे सवा घंटे का भी मौन व्रत रख लें, तो उनके विकार नष्ट होंगे और एक नई ऊर्जा मिलेगी।

मनु ऋषि से मौनी की उत्पत्ति

इस अमावस्या के बारे में यह भी मान्यता है कि इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था और मनु शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसी वजह से इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। कई धार्मिक ग्रंथों में भी इसका उल्लेख किया गया है। इस दिन मौन धारण करने का महत्व भी बताया है।

आज देर रात 1:10 से कल रात 12: 36 बजे तक रहेगी अमावस्या

ज्योतिषाचार्य आचार्य कृष्ण के अनुसार अमावस्या 10 फरवरी को देर रात 1:10 से 11 फरवरी की रात 12: 36 बजे तक रहेगी। इसे मौनी अमावस्या कहते हैं, इसलिए कुछ समय मौन अवश्य रखना चाहिए। मौन रहने से हमारे मन व वाणी में ऊर्जा का संचय होता है। मौन रहकर ईश्वर का मानसिक जाप करने से कई गुना ज्यादा फल मिलता है।

साधना के लिए श्रेष्ठ

आचार्य के अनुसार इस दिन श्रवण नक्षत्र और गुरुवार होने से ध्वज योग रहेगा। ध्वज योग में पूजा-उपासना, दान करने से यश व अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें क्योंकि इसमें पितृदेव विराजते हैं

ज्योतिषियों के मुताबिक इस दिन पीपल के पेड़ को जल अर्पित करना चाहिए। पीपल को अर्पित किया गया जल देवों और पितरों को ही अर्पित होता है। इसकी वजह यह है कि पीपल में भगवान विष्णु और पितृदेव विराजते हैं। इस दिन पीपल का पौधा रोपा जाना मंगलकारी होता है। पीपल की पूजा-अर्चना करने से कई गुना फल मिलता है।

मौनी अमावस्या पर मौन रह स्नान-दान करने से कई जन्मों के मिट जाते हैं पाप

आचार्य का कहना है कि माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान करना तो शुभ होता ही है, लेकिन मौनी अमावस्या पर इस स्नान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान-दान करने से कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं।

क्रोध करने से बचें

इस दिन किसी को अपशब्द न बोलें। बेहतर होगा कि ईश्वर का ध्यान करें। मौन रहकर मानसिक जाप करने से कई गुना ज्यादा फल मिलता है।


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