दुनियाभर की कार कंपनियों में इलेक्ट्रिक कार बनाने की होड़:जीएम और बेंटली के बाद जेएलआर ने भी किया ऐलान, जल्द ही लॉन्च करेंगी इलेक्ट्रिक कार बर्मिंघम लेखक: सिद्धार्थ फिलिप - AKB NEWS

दुनियाभर की कार कंपनियों में इलेक्ट्रिक कार बनाने की होड़:जीएम और बेंटली के बाद जेएलआर ने भी किया ऐलान, जल्द ही लॉन्च करेंगी इलेक्ट्रिक कार बर्मिंघम लेखक: सिद्धार्थ फिलिप


 कुछ देशों ने अगले दो दशक में डीजल-पेट्रोल वाहनों को बैन करने की घोषणा की है। इससे इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ेगी।

  • टाटा ग्रुप की कंपनी जगुआर लैंड रोवर के नए सीईओ ने तय किया 10 साल का लक्ष्य
  • दुनिया की बड़ी कार कंपनियाें में लगता है जल्द से जल्द पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनने की होड़ लग गई है। जनरल मोटर्स और बेंटले के बाद अब टाटा ग्रुप की कंपनी जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) ने अगले 10 साल में पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार कंपनी बनने का ऐलान कर दिया है।

    कंपनी के नए सीईओ थिएरी बोलोर ने अपनी गाड़ियों से इंटरनल कंबश्चन इंजन हटाने की योजना तैयार कर ली है। जेएलआर इलेक्ट्रिफिकेशन और इससे संबंधित टेक्नोलॉजी पर सालाना 2.5 अरब पाउंड (25 हजार करोड़ रुपए) खर्च करेगी।

    जेएलआर की अगले पांच साल में छह पूरी तरह इलेक्ट्रिक लैंड रोवर वेरिएंट लॉन्च करने की योजना है। कंपनी का लक्ष्य इस दशक के अंत यानी 2030 तक अपने सभी मॉडल को इलेक्ट्रिफाय करने का है। पेट्रोल-डीजल चलित वाहनों को लेकर बने कड़े उत्सर्जन नियमों को पूरा करने के लिए कंपनी को कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक में कंपनी को अपना भविष्य दिखाई दे रहा है।

    दुनिया के सभी बड़े ऑटो मेकर ने अगले एक से डेढ़ दशक के दौरान अपने वाहनों का इलेक्ट्रिफिकेशन करने या ऑल इलेक्ट्रिक होने का लक्ष्य रखा है। जनरल मोटर्स ने 2035 तक दुनिया भर में अपने पेट्रोल-डीजल चलित वाहनों को बंद करने का लक्ष्य रखा है। ब्रिटेन की लग्जरी कार निर्माता बेंटली ने भी 2030 तक ऑल इलेक्ट्रिक करने की योजना बनाई है।

    फोर्ड मोटर्स ने अगले पांच सालों के दौरान ऑल इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों पर 32 हजार करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य रखा है। टोयोटा और माज्दा ने इस साल के अंत तक 11.5 हजार करोड़ रुपए से बेसिक ईवी तकनीक विकसित करने का लक्ष्य रखा है। मर्सिडीज बेंज की पैरेंट कंपनी डेमलर ने 72.5 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है। वॉल्वो, फॉक्सवैगन, ऑडी, पोर्शे भी वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए अरबों रुपयों का निवेश कर रहे हैं।

    क्यों है ऑटो कंपनियों के बीच इलेक्ट्रिक होने की होड़?

    जीवाश्म ईंधन की मात्रा घट रही है। कुछ देशों ने अगले दो दशक में डीजल-पेट्रोल वाहनों को बैन करने की घोषणा की है। पेट्रोल-डीजल वाहनों के लिए कड़े उत्सर्जन भी मानक बना दिए हैं। इसके अलावा सबसे बड़ा डर टेस्ला है। इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला दुनिया की सबसे मूल्यवान कार कंपनी बन चुकी है।


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