नामांकन पर रोक:राज्य के तीन मेडिकल कॉलेजों में इस साल नहीं होगा नामांकन, एडमिशन पर रोक के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज: रांची - AKB NEWS

नामांकन पर रोक:राज्य के तीन मेडिकल कॉलेजों में इस साल नहीं होगा नामांकन, एडमिशन पर रोक के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज: रांची


 

  • बेंच ने पूछा- कॉलेजों में शिक्षक नहीं तो छात्र कैसे बनेंगे डॉक्टर
  • नेशनल मेडिकल कमीशन ने 15 अक्टूबर 2020 काे ही स्पष्ट किया था कि इन तीनाें काॅलेजाें में कई कमियां हैं
  • झारखंड के तीन मेडिकल काॅलेज पलामू, हजारीबाग व दुमका में सत्र 2020-21 के लिए नामांकन नहीं हाेगा। नामांकन पर लगी राेक हटाने की मांग काे लेकर अभ्यर्थियाें की ओर से दायर याचिका सुप्रीम काेर्ट ने मंगलवार काे खारिज कर दी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नागशेवर राव और जस्टिस कृष्ण मुरारी की खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने काॅलेज की कमियाें काे दूर करने की बात कही थी, पर तय समय में यह कमियां नहीं खत्म की गईं। मेडिकल काॅलेजाें में शिक्षक नहीं हैं, ऐसे में वहां छात्र कैसे डाक्टर बनेंगे?

    शीर्ष कोर्ट के निर्णय पर नीट के सफल अभ्यर्थियाें के अधिवक्ता वैभव नीति ने बताया कि साल 2020-21 के शैक्षणिक सत्र में इन तीनों काॅलेजों में नामांकन की अनुमति देने की याचिका दायर की गई थी। चार फरवरी काे सुनवाई के बाद काेर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। नेशनल मेडिकल कमीशन ने 15 अक्टूबर 2020 काे ही स्पष्ट किया था कि इन तीनाें काॅलेजाें में कई कमियां हैं। इस कारण यहां नामांकन मान्य नहीं हाेगा। इसी आदेश के खिलाफ अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट गए थे।

    छात्राें की दलील- उनकी गलती नहीं, इसलिए नामांकन हाे

    सुप्रीम कोर्ट में छात्राें ने दलील थी कि उनके भविष्य काे देखते हुए मेडिकल कॉलेजों में नामांकन की अनुमति दी जाए। उन्हाेंने नीट की परीक्षा दी, अच्छे अंक लाए, लेकिन अब नामांकन नहीं हाे पा रहा। काेर्ट ने एकेडमिक इयर 2019-20 में भी नामांकन की अनुमति दी थी। उस समय ताे इन काॅलेजाें में काफी कमियां थीं। उस समय की तुलना में अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हुए हैं। फैकल्टी की कमी है, जिसे दूर करने की बात राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से कही गई है। नेशनल मेडिकल कमीशन के चेयरमैन काे पत्र लिख कर बताया गया है कि कोरोना संक्रमण के कारण सारी कमियां दूर नहीं हो सकी, इसलिए कुछ समय दिया जाए ताकि सभी कमियां दूर की जा सकें।

    काेर्ट ने कहा- पिछले साल भी कमियां दूर करने को कहा था, पर नह्रीं हुआ

    काेर्ट ने सरकार का पक्ष देखने के बाद यह माना कि काॅलेजाें में जाे सुधार हाेने चाहिए थे, नहीं हुए। राज्य सरकार की ओर से इस बारे में बातें कही गई थीं, उसे पूरा नहीं किया। ऐसे में एडमिशन की अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकार शिक्षकाें की कमी काे दूर नहीं कर पाने के पीछे काेराेना काे कारण बता रही है, जबकि पिछले साल भी कमियाें काे दूर करने की बात कही गई थी। उस समय से अब तक भी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की दिशा में काम नहीं हुअा। स्वास्थ्य विभाग ने माना है कि झारखंड के तीनाें काॅलेजाें में 32 से 50 प्रतिशत तक एमबीबीएस सीटें खाली रह गई हैं।

    आगे क्या- कमियां अगले सत्र से पहले दूर करनी ही होगी़

    हर मेडिकल कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटें हैं। इस लिहाज से तीनाें मेडिकल काॅलेजाें में नामांकन नहीं हाेने से राज्य सरकार काे तीन साै मेडिकल की सीटाें का नुकसान हुआ है। अब अगले सत्र में नामांकन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सभी कमियां दूर करनी ही होगी।


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