दुष्कर्मियों को मिलेगी फांसी:दुष्कर्म में एक महीने में पूरी हाेगी सुनवाई, फांसी तक की सजा, ड्राफ्ट तैयार रांची4 घंटे पहले लेखक: बिनोद ओझा - AKB NEWS

दुष्कर्मियों को मिलेगी फांसी:दुष्कर्म में एक महीने में पूरी हाेगी सुनवाई, फांसी तक की सजा, ड्राफ्ट तैयार रांची4 घंटे पहले लेखक: बिनोद ओझा


 झारखंड में महिलाओं और बच्चाें के खिलाफ हाेने वाले अपराधाें, खासकर याैन अपराधाें की राेकथाम के लिए सरकार जल्दी ही सख्त कदम उठाने जा रही है। इसके लिए आंध्र प्रदेश के दिशा एक्ट की तर्ज पर झारखंड अपराध विधि संशाेधन अधिनियम लाने की तैयारी चल रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार हाे गया है।

इस एक्ट के लागू हाेने के बाद दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म की घटनाओं में एक महीने के भीतर जांच और सुनवाई पूरी करनी हाेगी। इसमें दाेषियाें काे कम से कम समय में उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा हाे सकती है। इसके लिए एक्ट में भी संशाेधन भी किया जाएगा। दरअसल राज्य में साल दर साल दुष्कर्म की घटनाओं में लगातार तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। लाख कोशिशों के बावजूद इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसी काे देखते हुए यह कानून लाया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि यह कानून बन जाने के बाद ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधियों पर तय समय में कठोर कार्रवाई होगी। इसका खौफ अपराधियों पर दिखेगा। वे अपराध करने से बचेंगे। इससे राज्य में कानून-व्यवस्था में भी सुधार होगा। पूर्व डीजीपी जीएस रथ ने कहा कि यह सरकार का बेहतर कदम है। लेकिन जांच एजेंसियों को आपस में तालमेल बनाकर काम करना होगा।

ऐसे ही गंभीर मामलाें काे देखते हुए सरकार ने यह कानून लाने का फैसला किया। ताकि अपराधियाें में डर बैठे और घटनाएं रुक सके।
ऐसे ही गंभीर मामलाें काे देखते हुए सरकार ने यह कानून लाने का फैसला किया। ताकि अपराधियाें में डर बैठे और घटनाएं रुक सके।

नए कानून की सख्तियों को ऐसे समझें- ताकि दुष्कर्म जैसी घटनाओं पर रोक लग सके

  • बच्चाें पर गंभीर लैंगिक अपराध : अभी कम से कम 14 साल की सजा का प्रावधान है। नए ड्राफ्ट के अनुसार यह सजा बढ़कर आजीवन कारावास तक हाे सकती है।
  • 16 साल से कम उम्र की महिला से दुष्कर्म : 20 साल से कम सश्रम कारावास की सजा नहीं हाेगी। यह आजीवन कारावास तक हाे सकता है।
  • पुलिस अफसर या लाेकसेवक दुष्कर्म का आराेपी हाे : 10 साल से कम सश्रम कारावास की सजा नहीं हाेगी। इसे भी बढ़ाकर आजीवन कारावास तक किया जा सकता है।
  • बच्चाें काे अगर जल्द परिपक्व करने के लिए ड्रग्स या हार्माेंस देता है ताे यह गंभीर लैंगिक अपराध माना जाएगा।

ये अपराध दायरे में

महिलाओं व नाबालिग के साथ दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, बच्चाें के साथ लैंगिक अपराध, महिलाओं पर तेजाब से हमला, महिला उत्पीड़न, किसी महिला काे चाेट पहुंचाने का भय दिखाकर जबरन प्रेम कि नहण बाध्य करने का प्रयास करना, इलेक्ट्राॅनिक माध्यम से महिला का चरित्र हनन करना आदि।

पिछले साल 11 महीने में दुष्कर्म की 1555 घटनाएं

साल 2020 में जनवरी से नवंबर तक पूरे राज्य में कुल 1555 दुष्कर्म की घटनाएं हुईं। इनमें सबसे ज्यादा राजधानी रांची में 187 घटनाएं दर्ज की गई। इसके अलावा गढ़वा जिले में 115, जमशेदपुर जिले में 102, चाईबासा जिले में 92, पलामू में 91 मामले दर्ज किए गए। कांके थाना क्षेत्र के लाॅ काॅलेज की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म किया था। इसी तरह दुमका में एक युवती से दर्जनभर युवकाें ने दुष्कर्म किया था। इन घटनाओं ने लाेगाें काे डरा दिया था।

क्या है आंध्र प्रदेश का दिशा कानून- एक हफ्ते में जांच, दो हफ्ते में सुनवाई पूरी करने का प्रावधान

आंध्र प्रदेश विधानसभा ने 13 नवंबर 2019 को दिशा अधिनियम पारित किया था। इसके तहत एक हफ्ते में जांच और 2 हफ्ते के अंदर सुनवाई पूरी करने का प्रावधान है। दुष्कर्म के मामलों में पुख्ता सबूत होने पर अदालतें 21 दिन में दोषी को मौत की सजा सुना सकती हैं। हैदराबाद गैंगरेप केस की पीड़िता को पुलिस ने दिशा नाम दिया था और उसी के नाम पर इसे दिशा कानून का नाम दिया है।

महाराष्ट्र में भी शक्ति विधेयक

महाराष्ट्र में भी शक्ति विधेयक तैयार किया गया है। इसके तहत दुष्कर्म, तेजाब हमले और सोशल मीडिया पर महिलाओं व बच्चों के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने जैसे अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है।

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