शरद पवार की सर्जरी सफल:NCP चीफ के गाल ब्लैडर से स्टोन को सफलतापूर्वक निकाला गया; आधे घंटे तक चली सर्जरी : मुंबई - AKB NEWS

शरद पवार की सर्जरी सफल:NCP चीफ के गाल ब्लैडर से स्टोन को सफलतापूर्वक निकाला गया; आधे घंटे तक चली सर्जरी : मुंबई


 80 साल के NCP चीफ शरद पवार की सर्जरी सफल रही। इसकी पुष्टि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने की। पवार मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट हैं। टोपे ने बताया कि ऑपरेशन के बाद पवार ठीक हैं। गाल ब्लैडर से स्टोन को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया है। उनका स्टोन एंडोस्कोपी के जरिये निकाला गया।

पवार की सर्जरी के बाद डॉक्टर अमित मायदेओ ने बताया, 'कुछ टेस्ट करने के बाद हमने उनकी सर्जरी करने का फैसला किया। हम बाद में उनका गाल ब्लैडर निकालने पर फैसला करेंगे। फिलहाल, वह निगरानी में हैं। माना जा रहा है कि यह सर्जरी देर रात हुई है और यह पूरी प्रक्रिया करीब आधे घंटे चली।

अचानक पेट में दर्द की वजह से एक दिन पहले एडमिट हुए पवार
रविवार को पेट में दर्द की शिकायत के बाद जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया और जांच रिपोर्ट में पता चला कि उनके पित्ताशय में समस्या है। इसके बाद पवार घर लौट आए और मंगलवार को उन्हें अस्पताल में फिर एडमिट करवाया गया, जहां उनकी एंडोस्कोपी की गई। NCP नेता नवाब मलिक ने बताया था कि पवार को उनके पूर्व निर्धारित ऑपरेशन से एक दिन पहले, मंगलवार को पेट में दर्द की शिकायत की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पवार ऐसे समय बीमार, जब NCP में संकट का दौर
महाराष्ट्र में NCP इन दिनों संकट से गुजर रही है। एक तरफ एंटीलिया और सचिन वझे मामले में NIA जांच कर रही है। वहीं महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर पूर्व पुलिस कमिश्रर ने 100 करोड़ की उगाही का टारगेट देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बीच विपक्ष देशमुख के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस सियासी संकट के बीच खबर है कि शरद पवार ने पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अहमदाबाद में मुलाकात की थी।

कभी डॉक्टर ने कहा था- सिर्फ 6 महीने बची है जिंदगी
NCP चीफ अपने जुझारू स्वभाव के लिए जाने जाते रहे हैं। कुछ साल पहले मुंह का कैंसर झेल रहे पवार से डॉक्टर्स ने यहां तक कह दिया था कि उनके पास सिर्फ 6 महीने का समय बचा है। हालांकि, अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने कैंसर के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी और उस पर जीत भी हासिल की। पवार खुद कहते हैं कि वे कैंसर के खिलाफ जंग इसलिए जीत सके, क्योंकि इस बीमारी से लड़ने की उनकी इच्छाशक्ति बहुत मजबूत थी। अगर इस लड़ाई में हार मान ली होती या काम करना बंद कर दिया होता तो कैंसर जीत जाता।

Previous article
Next article

Leave Comments

एक टिप्पणी भेजें

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads