शवों के सौदागर:लकड़ी मुफ्त, नियम नि:शुल्क दाह संस्कार का; पर कर्मचारी एक शव जलाने का मांग रहे 10 से 17 हजार : रांची - AKB NEWS

शवों के सौदागर:लकड़ी मुफ्त, नियम नि:शुल्क दाह संस्कार का; पर कर्मचारी एक शव जलाने का मांग रहे 10 से 17 हजार : रांची


शवदाह के लिए सौदेबाजी
  • * जुमार घाट पर रिपोर्टर - कोरोना से मौत हुई है, दाह संस्कार के लिए क्या लोगे?
  • * घाटकर्मी - घाघरा में 15 हजार लगेगा, हम यहां 10 हजार लेंगे, 5 शवों के साथ जलाए तो 7         हजार
  • रांची के लिए सुखद खबर है कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी हो रही है। साथ ही, मौत के आंकड़े में भी कमी आई है। राजधानी के श्मशान घाट में 20 दिन पहले तक रोजाना 70 से 80 संक्रमितों के शवों का दाह संस्कार हो रहा था, अब 20 से 25 हो रहे हैं। लेकिन, प्रशासन और नगर निगम की ढिलाई का फायदा उठाते हुए घाटों पर संक्रमित शव जलाने वाले मुंहमांगी कीमत वसूल रहे हैं। अधिकांश घाटों पर शवदाह के लिए सौदेबाजी हो रही है। मृतकों को मोक्ष दिलाने के लिए परिजनों को मोल-भाव करना पड़ रहा है।

    जबकि, सरकार ने कोरोना संक्रमित शव का नि:शुल्क दाह संस्कार कराने का आदेश दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण सिंह ने इससे संबंधित आदेश सभी जिलाें के डीसी को भी भेजा है। सरकार के आदेश के बाद दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने शहर के दो श्मशान घाटों पर पैसा मांगने वालों का स्टिंग किया। जुमार नदी पर तैनात शव जलाने वाले युवक 10 से 15 हजार तक में सौदा करते मिले, तो सीठियो श्मशान घाट पर शव जलाने के लिए लकड़ी देकर 17 हजार रुपए की मांग की गई। पैसा नहीं होने की बात पर जवाब मिलता है हमलोग मोक्ष दिलाते हैं, पैसे तो देने ही होंगे।

    जलावन में खर्च से पांच गुणा वसूल रहे हरमू मुक्तिधाम में सामान्य मौत का शव जलाने के लिए मारवाड़ी सहायक समिति 2200 रुपए लेती है। जितनी लकड़ी की जरूरत होती है, उतना ले सकते हैं। जबकि, अन्य श्मशान घाट पर 400 किलो लकड़ी खरीदने पर करीब 2500 रुपए खर्च आता है। लेकिन, श्मशान घाटों पर 10 से 20 हजार रुपए की वसूली हो रही है। नगर निगम या जिला प्रशासन के अफसर कभी जांच नहीं करते।

    1.स्थान- जुमार नदी श्मशान घाट

    रिपोर्टर- लकड़ी तो निगम देता है, फिर इतना पैसा काहे

    घाटकर्मी- लकड़ी किसका है ये छोड़िए, हमलोग मोक्ष दिलाते हैं, जितना मांग रहे उतना देना होगा

    रिपोर्टर- लाश जलाने वाले राहुल सहित तीन कर्मचारियों से पूछा- शव जलाना है, कितने देर लगेगी।
    राहुल (शव जलाना वाला)- तुरंत व्यवस्था हो जाएगी। कोरोना डेड बॉडी है या नॉर्मल?
    रिपोर्टर- कोरोना से मौत हुई है। इरबा के एक हॉस्पिटल में।
    राहुल- बॉडी लेकर आइए। इसके बाद हमलोग बात कर लेंगे। कुछ कम कर देंगे।
    रिपोर्टर- भाई, पहले पैसा बता दीजिए, तब यहां लाएंगे। ज्यादा लगेगा तो घाघरा ले जाएंगे।
    राहुल- अरे, बोले न लेकर आइए, घाघरा ले जाइएगा तो 15 हजार से कम नहीं लेगा।
    रिपोर्टर- शव जलाने के बाद अस्थि भी लेना है, इसलिए अलग चिता पर अंतिम संस्कार होगा न।
    राहुल- रुकिए, (मोबाइल पर किसी को फोन करके पूछने के बाद) अलग चिता पर नहीं हो पाएगा। पांच शव एक साथ जलेगा।
    रिपोर्टर- अरे नहीं, कोई उपाय बताइए ताकि अलग चिता पर शव का अंतिम संस्कार हो।
    राहुल- एक मिनट, (साथियों से बात करने के बाद) ठीक है अलग से हो जाएगा, लेकिन 10 हजार देना होगा। पांच लाश एक साथ जलेगा तो 7 हजार लेंगे।
    रिपोर्टर- ये तो बहुत अधिक है। हमारे पास पैसा नहीं बचा है। सब हॉस्पिटल में खर्च हो गया। तीन-चार हजार बचा है। हो जाए तो..
    राहुल- इतना में तो नहीं होगा भाई, कम से कम 8 हजार दे दीजिएगा। हमलोग चिता सजाते हैं, बॉडी लेकर आइए।
    रिपोर्टर- यहां तो निगम लकड़ी देता है न, फिर भी इतना पैसा क्यों मांग रहे हो। 1100 दे देंगे।
    राहुल- लकड़ी किसका है, उससे आपको मतलब नहीं। हम लोग लाश जलाकर मोक्ष दिलाते हैं। इसलिए, जितना मांग रहे उतना देना ही होगा, नहीं तो देख लीजिए दूसरे जगह।

    2. स्थान- सीठियो श्मशान घाट

    रिपोर्टर- कोरोना टेस्ट नहीं कराए हैं, पर बीमारी से मौत हुई

    घाटकर्मी- संदिग्ध मामला लग रहा है, हम चिता सजा देंगे, दूर से विधि करा देंगे, 16 हजार दीजिएगा

    रिपोर्टर- घाट पर मौजूद कर्मचारी से पूछा- धुर्वा के एक अस्पताल में मौत हो गई है। अंतिम संस्कार करना है। क्या व्यवस्था होगी।
    घाटकर्मी- कोरोना से मौत हुई है या सामान्य मौत है।
    रिपोर्टर- यह तो नहीं पता, सांस लेने में दिक्कत हुई थी। हॉस्पिटल पहुंचे तभी मौत हो गई। कोरोना जांच नहीं हुई थी।
    घाटकर्मी- एक नंबर दे रहे हैं (उमेश राम का) उनसे बात कर लीजिए, तभी शव जलेगा।
    रिपोर्टर- उमेश राम के मोबाइल नंबर 9955117265 पर फोन लगाकर, एक शव जलाना है।
    उमेश (शव जलाना वाला)- कोरोना जांच हुआ है क्या या सामान्य मौत हुई है।
    रिपोर्टर- कोरोना जांच नहीं हुआ है, लेकिन सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। हॉस्पिटल ले गए तभी मौत हो गई।
    उमेश- अभी कोरोना से ऐसे ही मौत हो रहा है। कोरोना से ही मौत है। यहां नहीं जल पाएगा शव। किसी दूसरे घाट पर ले जाइए।
    रिपोर्टर- अरे भाई, उनको सांस की समस्या पहले से थी। कोरोना नहीं हो सकता, संदिग्ध मामला है। इसलिए यहां आए हैं।
    उमेश- एक उपाय है। हम लोग लकड़ी दे देंगे और चिता भी सजा देंगे, लेकिन नजदीक नहीं जाएंगे। दूर से ही विधि करा देंगे, बोलिए..
    रिपोर्टर- ठीक है, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। पैसा कितना देना पड़ जाएगा।
    उमेश- लकड़ी करीब 11 मन लगेगा। आपका 17 हजार रुपए होता है, 16 हजार दे दीजिएगा।
    रिपोर्टर- यह तो बहुत अधिक हो गया न। कुछ कम होगा तो बताइए, ताकि बॉडी लेकर हमलोग आएं।
    उमेश- एक हजार कम दे दीजिएगा। उससे नीचे नहीं होगा। वैसे तो हमलोग संदिग्ध शव भी नहीं जलाते, आप परेशान हैं तो इतना कर देंगे।
    नोट: शव जलाने वाले कर्मचारियों से बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग भास्कर के पास मौजूद है।

    अनदेखी

    आदेश के बाद भी घाटों पर नहीं हो रही एंटीजन जांच

    स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि कोरोना से होने वाली मृत्यु और नेचुरल डेथ के बाद पूरे परिजनों की रैपिड एंटिजन टेस्ट कराने की व्यवस्था श्मशान घाट या कब्रिस्तान के अलावा घर जाकर किया जाना जरूरी है, ताकि कोविड-19 संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। साथ ही, कोरोना से मृत व्यक्तियों के अंतिम संस्कार हेतु श्मशान घाट व कब्रिस्तान में नि:शुल्क समुचित व्यवस्था करने का आदेश दिया है। कहा- इसके लिए वन निगम से जलावन सरकारी दर पर लें। कब्रिस्तान में भी मृतक के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करें। लेकिन आदेश के बावजूद कहीं भी ऐसी व्यवस्था नहीं दिखाई दी।

    जिम्मेदार बोले...शव जलाने के लिए पैसे मांगने वालों पर होगा केस

    कोरोना संक्रमित शव के अंतिम संस्कार के लिए हरमू मोक्ष धाम और घाघरा में व्यवस्था की गई है। जुमार नदी पर भी शव पहुंचता है, इसलिए वहां भी निगम की ओर से नि:शुल्क शव जलाने की व्यवस्था की गई है। वहां मौजूद लोगों द्वारा शव जलाने के बदले पैसा मांगने की शिकायत अभी तक नहीं आई है। 

  • अगर कोरोना संक्रमित शव जलाने के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं, तो दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
    -मुकेश कुमार, नगर आयुक्त, रांची

 

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