जन्म से पहले ही कोरोना!:गर्भ के अंदर और जन्म लेने वाले बच्चे हो रहे संक्रमित, 20% तक मिल रहे ऐसे मामले : लुधियाना
फोर्टिस में मरीज की मौत के बाद परिजन रोते-बिलखते हुए।
- * 1075 नए संक्रमित, 991 लुधियाना के, 31 की मौत, 1436 मरीज डिस्चार्ज
- * जगराओं में भाभी की मौत के बाद देवर ने भी दम तोड़ा
कोरोना की दूसरी लहर इतनी खतरनाक है कि गर्भ में बच्चे संक्रमित हाे रहे हैं। वहीं, जन्म लेने वाले 1-2 दिन के नवजातों में भी संक्रमण देखने को मिला है। यही नहीं, अपना ध्यान न रखने वाली महिलाअाें काे 3 महीने में गर्भपात कराने पड़ रहे हैं।
माहिरों के मुताबिक पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं में 100 में से 20 फीसदी मामले हैं, जिनमें गर्भवती संक्रमित महिला के 1-2 दिन के बच्चे पॉजिटिव मिले हैं। जबकि पहली लहर में अक्टूबर तक 179 महिलाओं की रिपोर्ट पॉजिटिव रही थी। इनमें कोई भी बच्चा संक्रमित नहीं मिला था।
गर्भवतियों की इम्युनिटी कमजोर होने से वायरस का हमला होने के ज्यादा डर है। डीएमसी की गाइनीकोलॉजिस्ट डॉ. आशिमा तनेजा ने बताया कि डिलीवरी के बाद बच्चे संक्रमित होने के 3-4 मामले हमारे पास आए हैं। वायरस में हुए बदलाव के कारण ये मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।
फोर्टिस हॉस्पिटल में ब्लैक फंगस के तीन नए मामले
फोर्टिस हॉस्पिटल के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. रजत भाटिया ने बताया कि ब्लैक फंगस के तीन नए मामले आए हैं। इनमें एक मरीज कोविड से रिकवर हो चुका था। उसकी आंख में समस्या के अलावा चेहरे में कमजोरी थी। दो अन्य मामले भी देखने को मिले हैं। जबकि दो अन्य मरीज सस्पेक्टेड हैं, जिनकी ब्लैक फंगस के लिए जांच चल रही है।
जिले में 12362 एक्टिव केस : मंगलवार को जिले में 1075 नए संक्रमित मिले। 991 मरीज लुधियाना व 84 मरीज बाहरी जिलों व राज्यों के हैं। 31 मरीजों की मौत हुई। इनमें से 21 लुधियाना के हैं। मृतकों में जगराओं के प्राइवेट हॉस्पिटल में दाखिल 36 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई। सोमवार को व्यक्ति की भाभी की भी कोविड मौत हुई है। 1436 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। जिले में अब तक 77637 संक्रमितों में से 63505 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। 12362 एक्टिव केस हैं।
पहले 3 महीनों में हो कोविड तो गर्भपात का रिस्क ज्यादा
अगर किसी गर्भवती को कोविड हुए ज्यादा समय हो जाए तो उस दौरान बच्चे तक संक्रमण जाने की संभावना रहती है। वहीं, अगर ध्यान न दिया जाए और महिला की स्थिति गंभीर है तो बच्चे तक ऑक्सीजन न पहुंचने से मां व बच्चे दोनों की मौत हो सकती है। अगर गर्भधारण के पहले 3 महीनों में कोविड हो जाए तो गर्भपात का रिस्क भी ज्यादा बढ़ रहा है। क्योंकि कोविड में तेज बुखार से मेटाबोलिज्म रेट ज्यादा हो जाता है। जिसके कारण कई बार गर्भपात हो हुआ है। -डॉ. गुरसिमरन कौर, गाइनीकोलॉजिस्ट, फोर्टिस हॉस्पिटल
^हमारे पास ऐसे 2-3 केस तो आ ही रहे हैं, जिनमें डिलीवरी के बाद बच्चे संक्रमित मिल रहे हैं। इसका एक कारण है कि गर्भवती महिलाएं डॉक्टर को ये बताने से झिझक रही हैं कि उन्हें बुखार हुआ है। ऐसे में देरी हो रही है और नुकसान हो रहा है। कई गर्भवती महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें बुखार भी है और टेस्ट के नतीजे भी सही नहीं आ रहे। ऐसे में उन महिलाओं की मौत हो जाती है। - डॉ. सरोज अग्रवाल, गाइनीकोलॉजिस्ट व आईएमए लुधियाना की प्रधान
डॉ. भाटिया ने कहा कि खुद से दवाई लेना इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है। बिना जरूरत और डॉक्टरी सलाह के स्टेरॉयड लेने से इम्युनिटी कमजोर होती है।
न ही गर्भवतियों की मौत हुई थी। जबकि इस बार मई के 18 दिनों में 44 महिलाओं की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है और 3 महिलाओं की मौत भी हो चुकी है। पहली लहर में गर्भाशय के अंदर तक संक्रमण न जाने के प्रमाण मिले थे। लेकिन, इस बार वायरस बच्चे को अंदर संक्रमित कर रहा है।


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