एक डॉक्टर के भरोसे 70 मरीजों की सांसें:हर बेड पर मरीजाें की तड़प व डाॅक्टर-नर्स की भागम-भाग धनबाद लेखक: जीतेंद्र कुमार
70 बेड...। हर बेड पर गंभीर मरीज...। सबकी एक ही परेशानी... सांस नहीं ले पा रहे हैं। ड्यूटी पर हैं डॉ. यूके ओझा। अचानक बेड नंबर 14 के पास हलचल बढ़ती है। नर्स भाग कर वहां पहुंचती है, खड़े होने का प्रयास कर रहे मरीज काे संभालती है। आवाज देने पर डॉ ओझा भी वहां पहुंचते हैं। उस मरीज काे देखना शुरू ही करते हैं कि बेड 26 का मरीज तड़पने लगता है। उखड़ती सांसाें से मदद के लिए चीखता है... नर्स वहां पहुंचती है।
डॉ ओझा बेड 14 के पास से ही 26 नंबर वाले मरीज को लंबी सांस लेने का इशारा करते हैं। मरीज लंबी सांसें लेने का प्रयास करता है और फिर शांत होकर बेड पर लेट जाता है। चंद मिनट बाद नर्स फिर डाॅक्टर के पास पहुंचकर बेड नंबर 30 के मरीज की स्थिति गंभीर बताती है। डॉ. यूके ओझा वहां पहुंचकर नर्स की मदद से मरीज को पीठ के बल लेटाने का प्रयास करते हैं।
कुछ देर में वह मरीज भी बेहतर महसूस करता है। एसएनएमएमसीएच कैथलैब स्थित डेडिकेटेड कोविड अस्पताल में भर्ती 70 मरीजाें की चढ़ती-उतरती सांसों काे नियंत्रित रखने की जिम्मेवारी एकमात्र डाॅक्टर पर है। हां, सहयाेग के लिए 10 से 14 नर्सें जरूर हैं। मशीनाें-उपकरणाें की टीं-टीं, घर्र-घर्र के बीच डॉक्टर एक मरीज से दूसरे मरीज की ओर भाग रहे हैं। एक तरह से अफरा-तफरी का माहौल है। दरअसल, संकट की इस घड़ी में मैनपावर की कमी ने यहां अव्यवस्था का माहौल बना दिया है।
मशीनाें-उपकरणाें की टीं-टीं, घर्र-घर्र के बीच मदद की गुहार... इसे सांस दो... उसे इंजेक्शन लगाओ
हर शिफ्ट में एक डॉक्टर, 14-16 मेडिकल स्टाफ
कैथलैब डेडिकेटेड कोविड अस्पताल में संक्रमित मरीजों के लिए 30 आईसीयू और 40 ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड हैं। 24 घंटे ऑक्सीजन, स्टेरॉयड, इंकॉगलेंट की सुविधा है। हालांकि, डॉक्टर की कमी है। 70 बेड के इस अस्पताल में तीन डॉक्टर ही हैं, यानी हर शिफ्ट में सिर्फ एक। वहीं, अन्य स्टाफ हर शिफ्ट में 14 से 16 तक हैं। ऐसे में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ के लिए 8 घंटाें की ड्यूटी किसी चुनौती से कम नहीं है।
सुनिए... आप अपने मरीज को थाेड़ा पकड़ लीजिए
किसी मरीज की हालत ज्यादा खराब है। वह खुद से कुछ भी कर पाने में असमर्थ है। ऐसे में उसे संभालने के लिए उसके परिजन काे वार्ड में बुलाया जाता है। नर्स बाहर बैठे परिजन को आवाज देती है- सुनिए... आप अपने मरीज को थाेड़ा पकड़ लीजिए। संक्रमण का खतरा होने के बावजूद परिजन अपने मरीज की तीमारदारी करते हैं। उनके पास ही रहते हैं। खाना खिलाते हैं और बाथरूम भी ले जाते हैं।
यहां बेहतर दिखी व्यवस्था जांच व जांच रिपोर्ट : जांच आसानी से हो और उसकी रिपोर्ट जल्द आ जाए... इसकी इस अस्पताल में अच्छी व्यवस्था दिखी। जांच कराने और रिपोर्ट लाने के लिए अलग से एक टीम बनाई गई है। टीम समय पर जांच कराती है और रिपोर्ट लाकर डॉक्टर को दिखाती है। सफाई : वार्ड में सफाई ठीक दिखी। तीन शिफ्टों में सफाई कर्मी तैनात हैं। हर शिफ्ट में वार्ड की सफाई की जाती है। जरूरत पड़ने पर 4 से 6 बार सफाई कर्मी वार्डों की सफाई कर रहे हैं।


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