धनबाद के सुबोध कुमार नए CBI के डायरेक्टर:दोस्त बोले- बदसलूकी पर सहपाठियों संग स्कूल में आंदोलन किया, दोषी छात्र को सजा मिलने पर ही माने : धनबाद - AKB NEWS

धनबाद के सुबोध कुमार नए CBI के डायरेक्टर:दोस्त बोले- बदसलूकी पर सहपाठियों संग स्कूल में आंदोलन किया, दोषी छात्र को सजा मिलने पर ही माने : धनबाद


 सीबीआई के नए डायरेक्टर… सुबोध कुमार जायसवाल। आज यह नाम सबकी जुबान पर। कौन है सुबोध? क्या है उनकी सफलता का राज? इनका बचपन कैसा था? ऐसे तमाम सवालों का जवाब जानने दैनिक भास्कर धनबाद के चासनाला की उन गलियों में गया, जहां उनका बचपन गुजरा था।

डिगवाडीह डिनोबिली स्कूल के उन छात्रों से बात की, जो सुबोध संग 10 वर्षों तक पढ़े। उनमें से एक सुप्रीम कोर्ट के वकील फिरोज अहमद ने बताया- एक बार एक छात्र ने सुबोध के दोस्त से बदसलूकी कर दी तो उन्होंने सहपाठियों के साथ स्कूल में आंदोलन किया।

 असेंबली नहीं की। अंतत: प्रिंसिपल को दोषी छात्र को सजा देनी पड़ी। पेश है, उनमें से कुछ खास किस्सें...

उप प्राचार्य जोसेफ ने कहा- पढ़ाई में खुद को औसत मान निराश छात्र सुबोध से सीखें

विकास खैरा, चैतन्य प्रसाद, कल्याण बनर्जी व सुब्रतो सरकार… आदि ये वे नाम थे, जो डिगवाडीह डिनोबिली स्कूल के 1978 बैच के ब्रिलिएंट छात्र थे। इस सूची में सुबोध का नाम कभी नहीं रहा। उस समय के डिनोबिली के उप प्राचार्य सीजे जोसेफ (90 साल के हैं) थे। अभी वे केरल में रहते हैं। कहते हैं कि सुबोध पढ़ाई में साधारण थे, पर असाधारण परिणाम देकर चौंका देते थे।

 मेहनत और सफलता पाने की जिद सुबोध को अन्य छात्रों से अलग करता था। जो बच्चे स्वयं को औसत समझ कर निराश रहते हैं, वे सुबोध की सफलता से बहुत कुछ सीख सकते हैं।

दोस्तों की नजर में सुबोध- गलत को गलत कहने की आदत

सुबोध के सहपाठी फिरोज अहमद, जो अभी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं, उन्होंने ने बताया कि सुबोध को शुरू से ही गलत को गलत और सही को सही कहने की आदत थी। डिनोबिली में कुछ खास बच्चों को अल्पसंख्यक मान ज्यादा सहूलियतें मिलती थीं। उन छात्रों के लिए अलग हॉस्टल होता था।

 एक बार एक छात्र ने उनके एक दोस्त के साथ थोड़ी बदसलूकी कर दी। इस पर अन्य छात्र भड़क गए। तीन घंटे तक क्लास का बायकॉट किया। असेंबली नहीं की। नारे लगे। छात्रों के इस आंदोलन की अगुवाई करने वालों में सुबोध भी थे। इसके बाद फादर हैस ने दखल दी। उन्होंने सुबोध व उनके साथियों के आंदोलन को सही माना और दोषी छात्र को सजा दी।

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