यूएई में पारा 51 डिग्री पार पहुंचा:पुलिस की चेतावनी- बच्चों को कार में अकेला छोड़ा तो पैरेंट्स को 10 साल सजा, 2 करोड़ जुर्माना लगेगा लेखक: दुबई से शानीर एन सिद्धीकी - AKB NEWS

यूएई में पारा 51 डिग्री पार पहुंचा:पुलिस की चेतावनी- बच्चों को कार में अकेला छोड़ा तो पैरेंट्स को 10 साल सजा, 2 करोड़ जुर्माना लगेगा लेखक: दुबई से शानीर एन सिद्धीकी


 संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में इन दिनों गर्मी कहर बरपा रही है। रविवार को अल ऐन के स्वीहान में पारा 51.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यह सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। बीते शुक्रवार को भी यहां पारा 51 डिग्री था। इस पर राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (एनसीएम) के प्रवक्ता ने कहा कि मई की तुलना में जून में तापमान 2-3 डिग्री बढ़ गया है। 

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यूएई अब तक का सबसे गर्म साल देखेगा। इससे पहले जुलाई 2002 में 52.1 डिग्री पारा पहुंच गया था। पर तीन दिन में 2 बार 51 डिग्री पहुंचना नई बात है।

यूएई के खगोल विज्ञानी हसन-अल-हरिरी ने कहा कि इतनी ज्यादा गर्मी एक अजीब मौसम की घटना है, पर इसको हर 11 साल पर होने वाली सूर्य गतिविधि से जोड़कर अभी नहीं देख सकते। 2020 से सूर्य अपने अधिकतम गतिविधि वाले चक्र में प्रवेश कर चुका है। यही इस गर्मी का कारण है, बिना आंकड़ों और विश्लेषण के यह कहना मुश्किल है।

 55 वर्षीय हरिरी ने बताते हैं कि बचपन यानी 70 के दशक में यहां गर्मी के मौसम में भी ठंडक रहती था, 90 के दशक के साथ गर्मी में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

अबू धाबी पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि माता-पिता या अभिभावक ने किसी भी कारण से बच्चों को कार के अंदर छोड़ा तो यह दंडनीय अपराध होगा। ऐसे लोगों को 10 साल की जेल और 10 लाख दिरहम (2 करोड़ रु.) तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
पुराने टायर बदलने के निर्देश

‘समर-सेफ-ट्रैफिक’ अभियान के तहत, अबू धाबी पुलिस ने ड्राइवरों से गाड़ियों के टायरों की जांच के लिए कहा है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हंै कि टायर पुराने या क्षतिग्रस्त तो नहीं हैं, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

बाहर पारा 40 डिग्री तो गाड़ी के अंदर 60 डिग्री तक हो सकता है : विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी गर्मी में बच्चों को गाड़ी में छोड़ना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि बाहर तापमान 40 डिग्री है तो 10 मिनट में ही गाड़ी के अंदर तापमान 60 डिग्री तक पहुंच सकता है। हीट स्ट्रोक और सफोकेशन से बच्चों की जान जा सकती है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि हर साल औसतन 40 बच्चों की मौत इस वजह से होती है। सबसे बड़ी बात है कि 55% माता-पिता ऐसे खतरे से वाकिफ नहीं होते हैं।

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