एक्शन में आई राज्य सरकार:झारखंड में दूसरी लहर में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों का होगा आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण, सरकार पहुंचाएगी मदद
कोरोना के कारण उजड़ चुके परिवारों की दयनीय हालत पर दैनिक भास्कर की खबर के बाद राज्य सरकार एक्शन में आ गई है। सरकार ने निर्णय लिया है कि झारखंड में इस साल कोरोना की दूसरी लहर में 15 मार्च से 09 जून के बीच मरने वाले 3983 संक्रमितों के परिवारों का आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसके पीछे की मंशा प्रभावित परिवारों को मदद पहुंचाना है।
इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने सभी डीसी को आदेश दिया है। इसमें कहा है कि जिन संक्रमितों की मौत हुई है, उनके परिवारों को सहायता पहुंचाने के लिए सरकार योजना बना रही है। सभी डीसी अपन जिले में टीम बनाकर सर्वेक्षण कराएं। सर्वेक्षण 25 जून तक पूरा करने के बाद रिपोर्ट भेजें। सर्वेक्षण के बाद कल्याणकारी योजनाओं के तहत प्रभावित परिवारों को लाभ दिया जाएगा।
प्रभावित परिवारों से ये जानकारी ली जाएगी
- * मृतक के परिवार में आश्रितों की संख्या और उनका वर्तमान पेशा।
- * मृतक का मुख्य व्यवसाय क्या था और कितनी वार्षिक आय थी?
- * राशन व गोल्डन कार्ड है या नहीं?
- * मृतक को पहले से गंभीर रोग था?
- * प्रभावित परिवारों के आवास और जमीन की उपलब्धता क्या है?
- * बैंक लोन भी है क्या?
निर्देश- संवेदनशीलता के साथ जानकारी लेगी टीम
डीसी को निर्देश है कि सर्वेक्षण टीम जब मृतक के परिवार वालों से मिले तो पूरी संवेदनशीलता बरते। ऐसा कोई भी प्रश्न नहीं पूछेगी, जिससे प्रभावित परिवार आहत हो। सर्वेक्षण में जिला स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के जिला स्तरीय सर्विलांस पदाधिकारी और डेवलपमेंट पार्टनर की भी सहायता ले सकते हैं।
भास्कर ने 779 परिवारों की पीड़ा सरकार तक पहुंचाई, जिनकी जिंदगी कोरोना ने तबाह कर दी
कोरोना से परिवारों की जिंदगी थम गई है, जिनके घर के इकलौते या मुख्य कमाऊ सदस्य को कोरोना खा गया। भास्कर की टीम झारखंड में ऐसे 779 परिवारों तक पहुंची, जो कोरोना में अपने प्रियजन को खोने के बाद आर्थिक रूप से उजड़ चुके हैं। इनमें 282 परिवार ऐसे हैं, जहां अब कोई कमाने वाला नहीं है। बाकी के परिवार एकमात्र कमाऊ सदस्य की मौत के बाद भुखमरी के कगार पर हैं।
भास्कर की इस सूची को जनप्रतिनिधियों ने सत्यापित किया व शासन-प्रशासन से मदद की सिफारिश की है। ये परिवार सदमे में हैं। तत्काल मदद चाहिए। हमारी रिपोर्ट में यह सामने आया कि प्रभावित परिवारों में 36% कर्ज में डूबे हैं। 39% की जमापूंजी खत्म हो चुकी है।


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