स्वच्छ भारत मिशन के तहत बन रहे शौचालय में मिली अनियमितता, ग्रामीणों ने जताया विरोध
स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रखंड क्षेत्रों में बनाए जा रहे शौचालयों में भारी अनियमितता बरता जा रही है। उक्त शौचालयों में चिमनी ईट की जगह बंगला इंट का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। साथ ही मृत पत्थर का छरी के साथ-साथ थर्ड ग्रेड का सीमेंट का भी उपयोग उक्त शौचालय में किया जा रहा है।
जबकि उसके बगल में टंकी के लिए खोदे जा रहे हैं। गड्ढों की गहराई मानक के अनुसार काफी कम खुदाई कर उसे जैसे तैसे करके ढलाई कर दी जा रही है। सभी शौचालय स्थानीय जल सहिया की देखरेख में कराया जा रहा है। प्रखंड के लवाही गांव के लाभुक ठाकुर टोला निवासी योद्धा मिस्त्री के घर पास बनाए जा रहे शौचालय में अनियमितता को लेकर टोले के ग्रामीणों ने विरोध जताया है। विरोध जता रहे ग्रामीण मनोज ठाकुर, नरेश साह, धनदेव ठाकुर, गोरख मिस्त्री, उमेश साह, बबलू साह, कृष्णा मिस्त्री, पिंटू साह सहित टोला के अन्य ग्रामीणों ने बताया कि शौचालय निर्माण में काला बालू व गला हुआ बंगला ईट का प्रयोग किया जा रहा है। जिससे कई शौचालय ध्वस्त होकर बेकार पड़ा हुआ है।
उन्होंने बताया कि ठेकेदार के द्वारा शौचालय निर्माण के नाम पर खानापूर्ति कर पैसा का बंदरबांट करने का काम किया जा रहा है। शौचालय का निर्माण जल सहिया के देखरेख में कराया जाना था, लेकिन जलसहिया कमीशन पर गांव के ही ठेकेदार कमलेश साह को शौचालय निर्माण के लिए जिम्मेवारी दे दिया गया। और ठेकेदार अपने मनमानी ढंग से घटिया सामग्री लगा कर शौचालय का निर्माण को पूर्ण करने का काम कर रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग अपने से कुछ बेहतर कर शौचालय बनाने की बात करते हैं तो उस पर सहिया के द्वारा बताया जाता है कि सरकार के नियमानुसार ही शौचालय बनाया जाना है। नहीं तो पैसा का भुगतान नहीं होगा। मजबूरन हम सभी लाभुक सहिया के द्वारा रखे गए ठेकेदार से ही अपने अपने शौचालय का निर्माण करा रहे हैं।
वहीं उन्होंने बताया कि क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में जल सहिया के माध्यम ठेकेदारों के द्वारा बनाए जा रहे एक भी शौचालय उपयोग के लिए नहीं रह रहा है। सरकार के द्वारा खुले में शौच पर रोकथाम के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर घर-घर शौचालय बनवाया जा रहा है।बताते चलें कि खुले में शौच से राज्य व देश को मुक्ति मिले लेकिन आज भी गांव व टोले की महिलाएं खुले में शौच को विवश हैं। पंचायत में खुले में शौच से मुक्ति का बोर्ड तो लगा दिया गया है, लेकिन आज भी ग्रामीण इलाके में लोगों को शोच के लिए अपने घर से बाहर जाना पड़ रहा है। खासकर बरसात के दिनों में महिलाएं को आज भी शौच के लिए अंधेरी रात का इंतजार करना पड़ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में लगभग सात सौ शौचालय का निर्माण ठेकेदार व जलसहिया के द्वारा कराया गया है। लेकिन अधिकतम शौचालय बेकार पड़ा हुआ है।
इस दौरान जानकारी पा कर हंगामा स्थल पर पहुंचे प्रमुख प्रतिनिधि घुर बिगन बैठा ने बन रहे शौचालय का जायजा लिया। साथ ही सभी तरह के सामग्रियों के बारे में ग्रामीणों से जानकारी हासिल किया। उनकी बात को सुन प्रतिनिधि ने बताया कि ग्रामीणों का विरोध जायज है। शौचालय का निर्माण में काला बालू व बांग्ला का घटिया इट लगाया जाना गलत है। पंचायत के सभी शौचालय को जांच कराया जाएगा। हंगामा कर रहे ग्रामीणों ने पंचायत में निर्माण कराए गए सभी शौचालय को गढ़वा उपायुक्त से जांच की मांग किया है। इस संबंध में जलसहिया लकुषा गुप्ता ने बताया कि वीडियो के निर्देश पर ठेकेदार के द्वारा शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। शौचालय निर्माण में घटिया सामग्री लगाया जा रहा है तो गलत है।
from Dainik Bhaskar

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