48% माता-पिता बोले- सिलेबस आधा हो, 31.7% ने कहा- वैक्सीन आने पर ही खुले स्कूल
स्कूल खोलने और पाठ्यक्रम को लेकर 31.7% अभिभावकों ने कहा है कि जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती है, स्कूल न खोले जाएं। 88% अभिभावकों की राय है कि मैट्रिक-इंटर का पाठ्यक्रम छोटा किया जाए। जबकि 48% अभिभावकों का कहना है कि बच्चों पर पढ़ाई का दबाव न बढ़े, इसलिए सिलेबस 50% छोटा कर दिया जाए। मात्र 25% ने ही कहा है कि सितंबर में स्कूल खोल दिए जाएं। ये बातें कोरोना संक्रमण के इस दौर में राज्य सरकार द्वारा किए गए सर्वे में उभरकर सामने आई हैं। 31 अगस्त की रात 12 बजे तक लोगों ने अपनी राय दी है।
नौवीं से 12वीं तक के छात्रों के 12320 अभिभावकों ने इस रायशुमारी में हिस्सा लिया। इनमें सरकारी स्कूलों के 5204, केंद्रीय स्कूल के 933, सरकारी अनुदानित स्कूलों के 656, निजी स्कूलों के 5527 छात्रों के अभिभावक शामिल हुए। मैट्रिक के 8363 और इंटर के 3957 छात्रों के अभिभावक हैं। सर्वे में अभिभावकों के नाम, मोबाइल नंबर, जिले का नाम, ईमेल, बच्चे की कक्षा, स्कूल का नाम और स्थान भी भरना था। पिछली बार हुए सर्वे में 72 हजार अभिभावकों ने राय दी थी। उसमें पहली कक्षा से लेकर इंटरमीडिएट के अभिभावकों ने हिस्सा लिया था।
सरकार के किसी भी निर्णय के साथ 14.14% अभिभावक
सबसे ज्यादा 31.70 प्रतिशत अभिभावक वैक्सीन आने के बाद स्कूल खोलने के पक्ष में हैं, जबकि 25.87 प्रतिशत सितंबर, 14.14 प्रतिशत स्कूल खोलने पर सरकार के किसी भी निर्णय के साथ हैं। अक्टूबर में 6.73 प्रतिशत, नवंबर में 3.02 प्रतिशत, दिसंबर में 4.12 प्रतिशत, जिला स्तर पर 21 दिन से करोना संक्रमित नहीं मिलने पर 7.32 प्रतिशत, राज्य स्तर पर 3.84 प्रतिशत, देश स्तर पर 1.94 प्रतिशत अभिभावकों ने स्कूल खोलने की इच्छा जताई है।
50% अभिभावकों की राय, डिजिटल कंटेंट का स्तर बढ़िया : 50 % अभिभावकों ने डिजिटल कंटेंट के स्तर को बढ़िया माना है। 4413 ने अच्छा, 934 ने एक्सीलेंट, 3392 ने सामान्य, 891 ने फेयर और 1383 अभिभावकों ने स्कूलों द्वारा दिए जा रहे डिजिटल कंटेंट को खराब बताया है। 11351 अभिभावकों ने ऑनलाइन क्लास में कंटेंट को उपयोगी और सहायक बताया।
खूंटी से सबसे कम, पू.सिंहभूम से सर्वाधिक राय
सर्वे में खूंटी से 28, पूर्वी सिंहभूम से से 3477, लोहरदगा से 57, जामताड़ा से 82, रांची से 1849, प. सिंहभूम से 778 और धनबाद से 726 सुझाव मिले। सुझाव देने में मैट्रिक के अभिभावक आगे रहे।
from Dainik Bhaskar

Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें