सरना धर्म काेड के लिए सड़क पर उतरा आदिवासी समाज, मानव शृंखला बनाई; चेताया- प्रस्ताव पास कर केंद्र को नहीं भेजा ताे जनगणना नहीं हाेने देंगे - AKB NEWS

सरना धर्म काेड के लिए सड़क पर उतरा आदिवासी समाज, मानव शृंखला बनाई; चेताया- प्रस्ताव पास कर केंद्र को नहीं भेजा ताे जनगणना नहीं हाेने देंगे

सरना धर्म काेड लागू करने की मांग काे लेकर रविवार काे आदिवासी समाज सड़क पर उतर आया। रांची सहित कई जिलाें में मानव शृंखला बनाई। राज्य सरकार से चालू विधानसभा सत्र में सरना धर्म काेड का प्रस्ताव पास कर केंद्र काे भेजने की मांग की। चेताया भी कि ऐसा नहीं हुआ ताे जनगणना नहीं हाेने देंगे। अब आर-पार की लड़ाई होगी। राष्ट्रीय आदिवासी इंडिजिनियस धर्म समन्वय समिति भारत, जय आदिवासी केंद्रीय परिषद, अादिवासी छात्र माेर्चा और आदिवासी छात्र संघ के आह्वान पर यह मानव शृंखला बनाई गई थी।

उधर, अन्य आदिवासी संगठनाें के डाॅ. करमा उरांव, सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा, अजय तिर्की, सुशील उरांव, शिवा कच्छप और अंतु तिर्की ने प्रेस काॅन्फ्रेंस कर कहा कि सरना धर्मकाेड लागू करने की मांग काे लेकर साेमवार काे माेरहाबादी मैदान में गांधी प्रतिमा के सामने उपवास और प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा । उन्हाेंने कहा कि अगर सरना धर्म काेड लागू नहीं हुआताे विधानसभा का आगामी शीतकालीन सत्र चलने नहीं दिया जाएगा।

इसी बीच अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की अध्यक्ष गीताश्री उरांव, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष नारायण उरांव, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के प्रदेश महासचिव रवि तिग्गा ने भी प्रेस काॅन्फ्रेंस कर बताया कि साेमवार काे हरमू बाईपास से बिरसा चाैक तक मानव शृंखला बनाई जाएगी।

लागू हुआ तो मिलेगी 15 कराेड़ आदवासियों काे अलग पहचान

प्रकृति की पूजा करने वाले, सरना स्थल पर पूजा करने वाले अपनी अलग पहचान चाहते हैं। इसलिए वे 2021 की जनगणना में अपने लिए अलग काॅलम की मांग कर रहे हैं। देश में जनगणना में अभी सात काॅलम हैं-हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बाैद्ध, जैन और अन्य। 2011 की जनगणना में इन्होंने खुद काे अन्य काॅलम में डालते हुए सरना धर्म का जिक्र किया। सरना धर्मकाेड लागू हाेने से देश में प्रकृति की पूजा करने वाले विभिन्न समुदाय के करीब 15 कराेड़ आदवासियों काे अलग पहचान मिलेगी। उन्हें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई की तरह सरकारी लाभ भी मिल पाएगा। उनका धार्मिक न्यास बन सकेगा।

अगले साल जनगणना, सत्र भी चल रहा, इसलिए उठा रहे मांग

2021 की जनगणना की प्रक्रिया दिसंबर में शुरू हाेने वाली है। अभी झारखंड में विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है। सरना धर्मकाेड की मांग करने वालाें का मानना है कि अगर विधानसभा से प्रस्ताव पास कर केंद्र काे भेजा गया ताे अगले साल हाेने वाली जनगणना में अलग से सरना धर्म काेड का काॅलम जुड़ सकता है। राज्य के सभी प्रमुख दल भाजपा, कांग्रेस और झामुमाे भी इसका समर्थन कर रहे हैं। 2019 के लाेकसभा और विधानसभा चुनाव के घाेषणा पत्र में भी इसे लागू करने का वादा किया था।

सभी प्रमुख पार्टियों ने चुनाव घोषणा पत्र में किया था वादा

सत्र छाेटा है, इसलिए आ रही दिक्कत : कांग्रेस

कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की ने कहा-कांग्रेस सरना धर्मकाेड लागू करने के पक्ष में है। चूंकि सदन से प्रस्ताव पास कराने से पहले कई तरह की प्रक्रिया है और सदन छाेटा है। इसलिए सीएम काे सदन के माध्यम से केंद्र काे संदेश देना चाहिए।

प्रस्ताव के लिए जरूरी तैयारी नहीं हुई : झामुमाे

झामुमाे महासचिव सुप्रियाे भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी सरना धर्मकाेड लागू करने के पक्ष में है। इसकी घाेषणा भी कर चुकी है। मानसून सत्र में प्रस्ताव के लिए आवश्यक तैयारी नहीं हुई है। काेई प्राइवेट बिल आता है ताे झामुमाे उसके पक्ष में जाएगा।

सरना धर्म काेड पर जल्द फैसला लेंगे : भाजपा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि पार्टी शीर्ष स्तर पर बैठक कर सरना धर्म काेड पर फैसला लेगी। भाजपा आदिवासियाें के सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्याें की रक्षा करने वाली पार्टी है। इस विषय पर राजनीति नहीं हाेनी चाहिए।

भाजपा सांसद समीर बाेले-पहले जनजातियाें की परिभाषा स्पष्ट हाे

भाजपा सांसद समीर उरांव ने कहा कि सरना धर्मकाेड से पहले जनजातियाें की परिभाषा स्पष्ट हाे। उन्होंने कहा कि इसकी मांग दूसरे धर्मावलंबियाें की ओर से नहीं होनी चाहिए।




Previous article
Next article

Leave Comments

एक टिप्पणी भेजें

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads